दार्जलिंग | मध्यप्रदेश में किसान आन्दोलन के दौरान हुई हिंसा की आग अभी ठंडी नही हुई थी की देश का एक और राज्य हिंसा की चपेट में आ गया है. गुरुवार को पश्चिम बंगाल में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के आन्दोलन ने हिंसा का रूप ले लिया. इस हिंसा में पुलिस अधिकारियो समेत कई लोग घायल हो गए. स्थिति बिगड़ते देख बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सेना बुलाने का फैसला किया.

गुरुवार को पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग में चल रहा जीजेएम का आन्दोलन अचानक हिंसक हो उठा. जीजेएम के समर्थको ने सरकारी संपत्तियों को नुक्सान पहुंचाते हुए उनमे आग लगा दी. वही समर्थको ने राज्य पुलिस पर भी जमकर पथराव किया जिसमे डीआईजी राजेश यादव, एडीजी उत्तर बंगाल और एसपी दार्जलिंग अमित जवालगी घायल हो गए. वही एक हवलदार भी प्रदर्शनकारियो के पथराव का शिकार हो गया. एक पत्थर सीधे उसकी आंख पर जाकर लगा जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गया.

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पुलिस के अनुसार जीजेएम के कार्यकर्ताओ ने पुलिस जीप , सरकार बस और कारो को निशाना बनाया. उन्होंने करीब 5 पुलिस जीप, एक सरकारी बस और 12 कारो को आग के हवाले कर दिया. स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर ममता बनर्जी ने मोचा सँभालते हुए सेना बुलाने का फैसला किया. इसके अलावा ममता ने गोरखा टेरेटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) के सचिव रविंद्र सिंह को हटाकर उनकी जगह नार्थ बंगाल के कमिश्नर वरुण राय को उनकी कमान सौप दी.

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दरअसल इस पुरे हंगामे के पीछे निकाय चुनावो के नतीजे है. इन चुनावो में तृणमूल कांग्रेस ने स्थानीय जीजेएम को शिकस्त दे जिसके बाद मोर्चा समर्थको ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. जीजेएम ने तृणमूल के खिलाफ एक अभियान चलते हुए उन पर आरोप लगाया की तृणमूल , दार्जलिंग में फूट डालो और राज करो की राजनीती कर रही है. इसके अलावा वो ममता सरकार के स्कूलों में बांगला भाषा को अनिवार्य करने का भी विरोध कर रहे है.

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गोरखा जनमुक्ति मोर्चा काफी पहले से अलग गोरखालैंड की मांग करता आया है. ऐसा 30 सालो बाद हुआ है की किसी मैदानी पार्टी ने दार्जलिंग में निकाय चुनावो में जीत हासिल की हो. यही बात जीजेएम को हजम नही हो रही इसलिए उन्होंने शुक्रवार को दार्जलिंग में बंद का एलान किया था और सभी पर्यटकों को दार्जलिंग से चले जाने को कहा था. इसी दौरान वहां हिंसा शुरू हो गयी. खबर है एयरलाइन कंपनिया इसी का फायदा उठाते हुए यात्रियों से हजारो रूपए वसूल रही है.


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