नैनीताल | अभी हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभाओ चुनावो के बाद से ही ईवीएम् पर उठा विवाद थमने का नाम नही ले रहा है. जहाँ करीब 18 विपक्षी दलों ने ईवीएम् पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति से मुलाकात की और आगामी चुनावो को बैलेट पेपर से कराने की मांग की. वही पिछले हफ्ते दिल्ली एमसीडी चुनावो के नतीजे आने के बाद आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए.

हालाँकि चुनाव आयोग हमेशा से इस बात से इनकार करता आया है की ईवीएम् में गड़बड़ी संभव नही है. इसी संशय को मिटाने के लिए चुनाव आयोग सर्वदलीय बैठक बुलाने पर भी विचार कर रहा है. लेकिन इससे पहले की वो इस बैठक की घोषणा कर पाता, उत्तराखंड हाई कोर्ट ने उनको झटका देते हुए कई विधानसभा क्षेत्रो की ईवीएम् सील करने के आदेश दे दिए. इसके अलावा सभी राजनितिक दलों को छह हफ्तों के अन्दर अपना जवाब दाखिल करने के लिया कहा है.

दरअसल पिछले हफ्ते ही नैनीताल हाई कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार नवप्रभात की याचिका पर सुनवाई करते हुए विकासनगर विधानसभा चुनावो के दौरान इस्तेमाल हुई ईवीएम् को सील करने का आदेश दिया था. यही नही नैनीताल हाई कोर्ट ने इसी मामले पर दोबारा सुनवाई करते हुए छह और विधानसभा क्षेत्रो की ईवीएम् सील करने का आदेश दिया है.

जस्टिस सर्वेश कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए आदेश दिया की अगले 48 घंटो के भीतर मसूरी, राजपुर, रायपुर, रानीपुर, हरिद्वार देहात और प्रतापपुर विधासभा चुनावो में इस्तेमाल हुई ईवीएम् को सील कर दिया जाए. हाई कोर्ट का यह आदेश चुनाव आयोग के लिए झटका माना जा रहा है. क्योकि अभी तक चुनाव आयोग यह कहता आया है की ईवीएम् में छेड़खानी संभव नही है, लेकीन कोर्ट का यह आदेश किसी और पहलु की तरफ ही इशारा कर रहा है.


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