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नई दिल्ली | नोट बंदी के फैसले के बाद गाँव देहात में लोगो को हो रही परेशानी से अब सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पुछा है की वो इस मामले में क्या कर रही है. इसके अलावा कोर्ट ने नोट बंदी पर आ रही याचिकाओ के लिए भी अपनी राय रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा की सभी याचिकाकर्ता एक साथ बैठकर तय करे की कौन से मुद्दे सुप्रीम कोर्ट के सामने रखने है और कौन से हाई कोर्ट के सामने.

नोट बंदी के बाद देश के गाँव देहात कैश की किल्लत से सबसे ज्यादा परेशान है. चूँकि गाँव देहात में प्लास्टिक मनी का चलन नही है इसलिए बिना कैश इन लोगो का गुजरा संभव नही है. इसी मामले को उठती एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा की नोट बंदी के बाद गाँव के लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ज्यादातर गाँव की आबादी कोआपरेटिव बैंकों पर निर्भर है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पुछा की वो गाँव में कोआपरेटिव बैंकों तक कैश पहुँचाने के लिए क्या कर रही है. कोआपरेटिव बैंकों के पास उचित मात्रा में कैश नही पहुंच पा रहा है. गाँव का किसान कैश के लिए कोआपरेटिव बैंक पर निर्भर करता है. ऐसे में अगर कोआपरेटिव बैंक में पैसा ही नही होगा तो उन लोगो की परेशानी कैसे दूर होगी. आप यह सुनिश्चित करे की गाँव में बैंकों के पास उचित मात्रा में कैश पहुंचे.

इस पर केंद्र सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए अटोर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा की सरकार ने यह मामला संज्ञान में लिया था और कोआपरेटिव बैंक वाले मुद्दे को पहले ही देखा जा चूका है. मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता में पीठ ने नोट बंदी पर याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ताओ को राय दी वो एक साथ बैठकर यह तय करे की किन पहुलुओ की सुनवाई हाई कोर्ट करेगा और किन पहुलुओ की सुप्रीम कोर्ट.


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