नई दिल्ली | मोदी सरकार ने लगभग हर सरकारी सेवा के लिए आधार को जरुरी करने का फैसला किया है. बैंक खातो से लेकर पैन कार्ड तक, सरकार ने हर जगह आधार को अनिवार्य बना दिया है. सरकार का कहना है की इस कदम से देश के अन्दर भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट सरकार के इस तर्क से इत्तेफाक नही रखता. सुप्रीम कोर्ट पहले भी सरकार के आधार को अनिवार्य करने के फैसले पर सवाल उठा चूका है.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को झटका देते हुए आधार कार्ड को पैन कार्ड के साथ जोड़ने के फैसले पर रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा की जब तक संवैधानिक पीठ मामले की सुनवाई पूरी नही कर लेती तब तक सरकार के फैसले पर रोक जारी रहेगी. न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया.

इस मामले में याचिकाकर्ता विनय विसमन , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता है. उन्होंने कोर्ट में याचिका डाल सरकार के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी. विसमन की और से खंडपीठ के सामने पेश हुए वकील अरविन्द दातार ने कोर्ट को बताया की आधार को पैन कार्ड के साथ जोड़ने से खतरनाक नतीजे सामने आएंगे. इससे न सिर्फ लोग प्रभावित होंगे बल्कि छोटे व्यापारीयो का रोजगार चोपट होने के कगार पर पहुँच जायेगा.

वकील विसमन की दलील थी की सरकार इस आदेश के जरिये आधार को अनिवार्य करने की और अग्रसर है. इसलिए इस पर रोक लगनी चाहिए . याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने चार मई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था. बताते चले की मोदी सरकार ने आयकर अधिनियम में बदलाव करके आधार कार्ड को पैन कार्ड के साथ जोड़ने को अनिवार्य कर दिया था. उन्होंने आयकर अधिनियम में नई धारा 139ए को शामिल किया था.


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