लखनऊ | उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड में अनियमिताओ की शिकायत मिलने के बाद इनको भंग करने का फैसला किया है. इसके लिए कार्यवाही शुरू कर दी गयी है. योगी सरकार ने शिया वक्फ बोर्ड के 10 सदस्यों में से 9 को उनके पद से हटा दिया है. इसके अलावा बोर्ड के चेयरमैन को भी हटाने के लिए कानून विदो की राय ली जा रही है. हालाँकि वक्फ बोर्ड ने सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात कही है.

योगी सरकार के वक्फ बोर्ड को भंग करने के फैसला का मुस्लिम धर्मगुरुओ ने स्वागत किया है. उनका कहना है की कुछ लोग गिरोह बनाकर वक्फ की संपत्तियों को हड़प रहे है. इसलिए इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए. इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा. एक मुस्लिम धर्मगुरु ने तो पूर्व मंत्री आजम खान पर ही वक्फ बोर्ड की संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया.

सहारनपुर के शहर काजी मौलाना नदीम अहमद ने योगी सरकार की कार्यवाही पर ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा की धर्म की बात करने वाले लोगो ने वक्फ में अरबो रूपए का हेरफेर किया है. इसलिए सरकार का यह कदम सराहनीय है. सपा बसपा की सरकारों ने वक्फ में अपने लोगो को बैठाकर वहां की संपत्तियों को हड़पने का काम किया. इससे कौम को कोई फायदा नही हुआ है.

मौलाना नदींम अहमद ने मांग की , की हर पांच साल बाद बोर्ड के सदस्य बदलने चाहिए. उधर मौलाना जव्वाद ने शिया वक्फ बोर्ड में आजम खान और बोर्ड के अध्यक्ष वासिम रिजवी पर शिया वक्फ बोर्ड में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए राज्यपाल राम नाईक से मुलाकात की. उनका कहना है दोनों ने मिलकर बोर्ड में घोर वित्तीय अनियमिताए की है. उधर पुरे मामले पर वासिम रिजवी ने कहा की सरकार बदले की भावना से काम कर रही है. हम सरकार के इस कदम को अदालत में चुनौती देंगे.


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