झांसी.सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड में पानी को लेकर हालात लगातार भयावह होते जा रहे हैं। बांधों में पानी बहुत कम बचा है। तालाब सूखते जा रहे हैं। नदियों की दशा निरंतर बदतर हो रही है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश की जल संसाधन और नदी विकास मंत्री उमा भारती के क्षेत्र झांसी में 158 गांव ऐसे हैं, जहां न तो इंसानों के लिए समुचित पानी बचा है और न ही जानवरों के लिए। यहां पानी के लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है।
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 मार्च में ये हाल है, तो जून में क्या होगा
बुंदेलखंड में पानी को लेकर अफसरों का दम अभी से फूलने लगा है। उनकी सांसें तेजी से ऊपर-नीचे होने लगी हैं। अफसरों की सबसे बड़ी चिंता तो यह है कि अभी मार्च में जब गर्मी पड़नी शुरू हो रही है, तब ये हाल है, तो मई और जून में क्या होगा? गौरतलब है कि बुंदेलखंड के पठारी क्षेत्र में मई-जून में पारा 45 डिग्रीसेल्सियस के पार होता है। उस स्थिति की कल्पना मात्र से अफसरों के होश उड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री की विशेष नजर का सता रहा है डर
सत्ता में रिपीट की तैयारियों में जुटे मुख्यमंत्री अखिलेश की विशेष नजर भी 19 विधानसभा सीटों वाले बुंदेलखंड पर है। प्रदेश के मुख्यसचिव आलोक रंजन भी जब-तब समीक्षा बैठकों में आला अफसरों को यह याद दिलाते रहते हैं कि बुंदेलखंड मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में है। इसीलिए जिला और मंडल स्तरीय आला अफसर भी अधीनस्थों को क्षेत्र में पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करने की नसीहत देते रहते हैं।
फिलहाल इस तरह के दिए गए निर्देश
झांसी जिले के जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने समस्याग्रस्त क्षेत्रों में पानी के लिए फिलहाल इस तरह निर्देश जारी किए हैं-
– सभी समस्याग्रस्त गांवों में एक-एक नया हैंडपंप लगवाया जाए।
– जहां समस्या ज्यादा है, वहां सबसे पहले हैंडपंप लगवाया जाए।
– पाइप लाइन से आपूर्ति वाले क्षेत्रों में अधिकारी जाकर देखें और अगर कोई समस्या है तो उसका निराकरण करें।
– अगर बिजली के कनेक्शन के कारण कोई पेयजल परियोजना बंद है, तो तुरंत ही उसे चालू करवाया जाए।
– टैंकरों से जलापूर्ति के लिए रोडमैप तैयार किया जाए।
– जानवरों के लिए चारा कैंप के नजदीक ही पानी का इंतजाम किया जाए। (Patrika)

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