नई दिल्ली : विश्व सूफी सम्मेलन के आखिरी दिन जारी घोषणापत्र में आतंकवाद को इंसानियत और इस्लाम का दुश्मन घोषित किया गया. पाकिस्तान से आए सूफी धर्मगुरू ताहिर उल कादरी ने इस मौके पर भारत-पाकिस्तान से साथ मिलकर आतंकवाद से लड़ने की अपील की.

सूफी सम्मेलन में आतंकवाद की निंदा, 'IS और तालिबान इस्लाम के खिलाफ'

पाकिस्तान के जाने-माने धर्मगुरू और सूफी विद्वान ताहिर उल कादरी की ये अपील दिल्ली में चल रहे विश्व सूफी सम्मेलन के आखिरी दिन गूंजी.

ताहिर उल कादरी ने आतंकवाद को पूरी इंसानियत का दुश्मन बताते हुए इसके खात्मे की अपील की.

विश्व सूफी सम्मेलन में दुनिया भर से डेढ़ सौ से ज्यादा विद्वान जुटे थे. सम्मेलन के आखिरी दिन विश्व सूफी फोरम ने अपना घोषणापत्र जारी किया.

इसमें कहा गया, “हम तालिबान, अल कायदा और ISIS जैसे आतंकवादी संगठनों की उस विचारधारा की निंदा करते हैं, जो इंसानियत के खिलाफ है और दुनिया भर में तबाही फैला रही है. हमारी मुस्लिम नौजवानों से पुरजोर अपील है कि वो शांति और इस्लाम के दुश्मन ऐसे आतंकी संगठनों से खुद को दूर रखें और कट्टरपंथी सोच से बचें.”

आपको बता दें कि 17 फरवरी को इस सम्मेलन का आगाज करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि अल्लाह के 99 नामों में से कोई भी हिंसा से नहीं जुड़ा है. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ लड़ाई नहीं है.

विश्व सूफी सम्मेलन के घोषणा पत्र में मोदी सरकार से जो 25 मांगें रखी गईं. इसके तहत देश में सूफी सर्किट बनाने, दिल्ली में सूफी इंटरनेशनल सेंटर और राज्यों में सूफी सेंटर बनाने की बात कही गई है. स्कूल-कॉलेजों में सूफीवाद की पढाई शामिल करने और सूफीवाद को बढ़ावा देने के लिए अजमेर में सूफी यूनिवर्सिटी बनाने और दूसरे देशों के सूफी दरगाहों की यात्रा आसान करने के लिए उनके साथ सूफी कॉरीडोर बनाने की मांग के अलावा अलीगढ़ और जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा बहाल रखने की भी अपील शामिल है.

दंगों के कारण मुसलमानों में डर पनपने की बात करते हुए सरकार से दंगाइयों के खिलाफ कारर्वाई के बारे में बयान जारी करने की अपील भी की गई (ABP)


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