राष्ट्रीय महिला आयोग ने ट्रिपल तलाक के मुद्दें पर सुनवाई कर रही संवेधानिक बेंच में एक भी महिला जज नहीं होने पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है.

आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान शोरगुल को देखकर और बेंच के जजों का धर्म अलग-अलग देखकर मुझे लगा कि ये मामला धर्म का नहीं है, बल्कि ये मामला महिलाओं और बच्चों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है.’

उन्होंने कहा कि, ‘कम से कम एक महिला जज तो होनी ही चाहिए. मैं किसी भी जज की क्षमता पर सवाल नहीं उठा रही हूं, लेकिन जस्टिस आर बनुमथी को इस बेंच की हिस्सा होना चाहिए.’ ध्यान रहे पांच जजों की इस संवैधानिक पीठ में अलग-अलग धर्मों के जज है.

कुमारमंगलम ने मुद्दे की लैंगिक संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि, ‘मैंने जिन मुस्लिम महिलाओं से बात की है, उनका कहना है कि जिस तरह आज के मर्द ट्रिपल तलाक का इस्तेमाल करते हैं वह कुरान से बिल्कुल अलग है, आज पुरुष इसका दुरुपयोग करके महिलाओं को सताने और उन्हें हाशिए पर भेजने की कोशिश करते हैं.


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