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लखनऊ । उत्तर प्रदेश में मुसलमानों ने अपनी एकता के लिए कदम उठाना शुरू कर दिया हैं. लखनऊ में शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जवाद ने लखनऊ आवास पर मुस्लिम धर्मगुरूओं की एक आपातकालीन बैठक बुलाई. जिसमे कहा गया कि मुसलमानो की आवाज़ बुलंद करने के लिए मुसलमानों को आपसी भेदभाव छोड़कर एक मंच पर आना ही होगा.

बैठक में विश्व प्रख्यात वक्ता मौलाना हबीब हैदर ने यूपी की समाजवादी द्वारा जारी अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन और मुसलमानों से किए चुनावी वादों को पूरा न करने के संबंध में एक रैली का प्रस्ताव रखा जिसे बैठक में शामिल सभी लोगो ने सर्वसम्मति के साथ स्वीकार कर दिया.

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बैठक में शामिल धर्मगुरूओं ने कहा कि जिस तरह राज्य सरकार ने मुसलमानों के अधिकारों पर आँखे बंद की हैं और चुनावों में किये गए वादों को अब तक नहीं पूरा किया हैं उसका जवाब पूरे राज्य के मुसलमान आने वाले चुनाव में उनको वोट ना देकर देंगे, क्योंकि अब मुसलमानों को समझ लेना चाहिए कि इस अत्याचार का जवाब कैसे दिया जाता है।

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बुद्धिजीवियों ने कहा कि मौजूदा सरकार में डीएसपी ज़ियाउल हक़ की हत्या, एनआईए अधिकारी तंज़ील अहमद और एसआई मोहम्मद अख्तर की हत्या हुई, दादरी जैसी हृदयविदारक घटना और मुज़फ़्फरनगर दंगा हुआ, लेकिन राज्य सरकार ने इन सब मामलों में किसी पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की।

मौलाना कल्बे जवाद ने रैली की तारीख 18 सितम्बर  घोषित करते हुए कहा कि लखनऊ के ज़िलाधिकारी को अनुमति पत्र भी भेज दिया है। मौलाना के सचिव फ़राज़ नक़वी के अनुसार रैली के संबंध में सभी आवश्यक मामलों को पूरा करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्तावित रैली में शिया सुन्नी दौनो तरफ के धर्म गुरुओं के आलावा बड़ी संख्या में बुद्धजीवी भी शामिल होंगे।


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