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गुजरात के ऊना में गोरक्षा के नाम पर हुई पिटाई को दलित युवक भुला नहीं पा रहें हैं. वारदात को 8 दिन बीत चुके हैं लेकिन उनके लिए इस हादसे को भूल पाना नामुमकिन हो चूका हैं.

रमेश सर्वैया, बाबू हीरा, अशोक बिजल और बेचर उगाभाई को मरे हुए जानवरों की चमड़ी उतारने का अपना पुश्तैनी काम करने पर गोरक्षा दल ने पीटा था. उस घटना को याद करते हुए रमेश बताते हैं, ‘वे एक घंटे तक हमें लोहे की पाइप और डंडों से पीटते रहे. हमने जैसे उस वक्त अपनी मौत को ही देख लिया था। हम पूरी जिंदगी में फिर कभी यह काम नहीं करेंगे.

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रमेश ने आगे कहा, ‘सरकार हमें मुआवजा देने का प्रस्ताव दे रही है, लेकिन अगर प्रशासन हमें उन सबको पीटने की इजाजत दे जिन्होंने हमें पीटा था, तो हम इसके बदले 1 लाख रुपये देने को तैयार हैं.

उन्होंने घटना को याद करते हुए बताया कि हम मरे हुए जानवरों की चमड़ी लेकर जा रहे थे कि तभी 2 कारें हमारी ओर आईं. फिर एकाएक वहां 5-7 कारें और आ गईं. उनमें करीब 40 लोग थे। उन्होंने हमें रोका और बेदर्दी से हमें पीटने लगे. हमने उनसे कहा कि हमने गायों को नहीं मारा है, लेकिन वे हमारी बात सुनने को तैयार ही नहीं थे. जब मेरे पिता हमें बचाने आगे आए, तो उन लोगों ने उनको भी मारा.

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