“ विश्वविद्यालय में छिड़ी आर-पास की लड़ाई, अदालत में हुई हिंसा का चौतरफा विरोध, आग और भड़कने की आशंका”

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लड़ाई अब आर-पार की हो गई है। आज दिल्ली के पटियाला हाउस में जिस तरह से जेएनयू और मीडिया वालों पर एकतरफा हमला बिना किसी उकसावे के किया गया, उससे साफ है कि जेएनयू के खिलाफ  भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। पुलिस के सामने अदालत में जेएनयू के अध्यापकों, छात्रों और मीडियाकर्मियों की पिटाई, महिलाओं के साथ शारीरिक छेड़छाड़-बेहद गंभीर घटना है। इसने न्यायायिक प्रणाली और लोकतंत्र दोनों के लिए चुनौती पेश की है।

जेएनयू में अफजल गुरू पर हुए कार्यक्रम में लगाए गए पाक समर्थक नारों और भारत के खिलाफ भड़काऊ नारों के सवाल को केंद्र सरकार, भाजपा और एवीबीपी ने जिस तरह से जेएनयू संस्था के खिलाफ मोड़ दिया है, वह सारे अकादमिक जगत को उद्लित कर रहा है। जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया पर राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाकर गिरफ्तारी करना, पूरे जेएनयू को देशद्रोही और आतंकवादी समर्थक घोषित करना –भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। जेएनयू में प्राध्यापक प्रो. विवेक कुमार का कहना है कि केंद्र सरकार दरअसल जेएनयू को नेस्तानाबूद करने की तैयारी में है। जेएनयू के लोकतांत्रिक मूल्यों से भाजपा और उसकी सरकार खौफजदा है और अब राष्ट्रवाद का भूत खड़ा करके छात्रों को दबाने की साजिश की जा रही है। लेकिन यह भारी पड़ेगी।

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जेएनयू की आग आज परिसर से बाहर फैल गई। अदालत में आज जो हुआ और जिस तरह से हुआ, उससे यह आशंका है कि आगे आने वाले दिनों में यह और हिंसक और कुरूप हो सकती है। आज की हिंसा के बाद देश और विदेश से बुद्धिजीवी तबका का इस लड़ाई में जेएनयू छात्र यूनियन तथा टीचर यूनीयन के पक्ष में खड़ा होना लाजमी हो गया है। लेकिन सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े टकराव में जाने के बाद, केंद्र सरकार इसका हल क्या निकालेगी। क्या वह वाकई जेएनयू और उस जैसी अन्य शैक्षणिक संस्थाओं जहां विरोध और विचारधारा पर खुली बहस होती हैं, उन्हें बंद करने की सोच रही है ?

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इंदिरा गांधी द्वारा इमेंर्जेंसी के दौरान जेएनयू अध्यक्ष को गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद अब हुआ है। जेएनयू यूनीयन की की उपाध्यक्ष शेहला मसूद ने कहा, किसी को अगर सच्ची राष्ट्रभक्ति सीखनी है तो जेएनयू से सीखनी चाहिए। केंद्र सरकार और संघ हमसे डरता है, क्योंकि हम ही उसे कड़ी चुनौती देते हैं। जेएनयू एक विचारधारा है, इसे मिटाना इतना आसान नहीं है, यह मोदी सरकार को समझ लेना चाहिए। आज जिस तरह से महिलाओं और टीचरों तथा मीडिया पर खुलेआम हमला किया, उससे साफ है कि ये घिर गए हैं। उधर, खबर मिल रही है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व जेएनयू में बढ़ रहे विरोध को किसी भी कीमत पर कुचलने का मन बना चुके हैं। आने वाले दिनों में और भी सख्त कार्रवाई के संकेत हैं।  (outlookhindi)

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