अहमदाबाद | हाल ही में ऐसी घटनाये घटित हुई है जिसके बाद देश को मजहब के नाम पर बांटने की कोशिश की गयी है. चाहे गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमो को निशाना बनाने की घटना हो या फिर बंगाल में भड़की हिंसा को हवा देने की घटना. हर जगह अपने राजनितिक फायदे के लिए देश की एकता को ताक पर रखा गया. लेकिन देश में आज भी ऐसे लोग मौजूद है जो संप्रदायिक सोहार्द के लिए मिसाल कायम कर जाते है.

इन्ही लोगो की वजह से कुछ संगठनो के मंसूबे कामयाब नही हो पाते. एक ऐसी ही मिसाल गुजरात में भी देखने को मिली. यहाँ एक हिन्दू शख्स की वजह से एक मुस्लिम युवक को नयी जिन्दगी मिली. यह इंसानियत का एक खूबसूरत रूप है की हिन्दू मुस्लिम दंगो की भेंट चढ़ा गुजरात गुरुवार को हिन्दू मुस्लिम एकता की एक मिसाल कायम करता हुआ दिखाई दिया.

दरअसल सूरत के रहने वाले 21 वर्षीय अमित हलपति के परिजनों ने अपने बेटे का दिल अहमदाबाद के रहने वाले 36 वर्षीय सोहेल को देने का फैसला किया. इस फैसले को अंजाम तक पहुँचाने के लिए सूरत से अहमदाबाद तक ग्रीन कोरिडोर बनाया गया. केवल 85 मिनट में अमित का दिल अहमदाबाद पहुँच गया. इसके बाद डॉक्टर्स ने अमित का दिल सफलतापूर्वक सोहले के शरीर में प्रत्यार्पित कर दिया गया.

इस तरह कहा जा रहा है की एक हिन्दू का दिल मुस्लिम युवक के सीने में धड़कने लगा. बता दे की एक दुर्घटना में अमित बुरी तरह घायल हो गया था. इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर्स ने उसको ब्रेन डेड घोषित कर दिया. मृत घोषित होने के बाद अमित के परिजनों ने उसके शरीर का दिल, किडनी और आँखे दान देने का फैसला किया. एक एनजीओ की मदद से पता चला की सोहेल को दिल की जरुरत है.

सोहेल का दिल केवल 15 फीसदी ही काम कर रहा था इसलिए उसे नए दिल की सख्त दरकार थी. केवल नया दिल ही उसकी जिन्दगी को बचा सकता था. जब यह बात अमित के परिजनों को पता लगी तो उन्होंने तुरंत अपने बेटे के दिल को अहमदाबाद भेजने का फैसला किया. इसके लिए सूरत से अहमदाबाद ग्रीन कोरिडोर बनाया गया और 85 मिनट में दिल को अहमदाबाद के निजी अस्पताल में पहुंचा दिया गया.


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