akhlaq

सितंबर 2016 में दादरी में हुए गोमांस हत्या कांड में बीबीसी ने एक विशेष तहकीकात की. गोमांस खाने और घर पर रखने की अफवाह फैलने के कारण भीड़ के हाथो मरे गए अख़लाक़ के घर से पुलिस ने कोई भी गोश्त का सैंपल नहीं लिया गया था.
दादरी के एसपी अनुराग सिंह ने बीबीसी को बताया कि,”अख़लाक़ के घर या फ़्रिज से गोश्त का कोई सैंपल कभी भी लिया ही नहीं गया था’.जबकि हाली में यह इलज़ाम लगाया जा रहा था, कि अख़लाक़ के घर से जो गोश्त का सैंपल लिया गया था वह गोमांस था. बजाय इसके एक रिपोर्ट में सामने आया कि गोश्त के सैंपल गाय वंश से हैं.

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बीबीसी दुवारा उठाये गए कुछ एहम नुक्तों पर नज़र-

गोश्त का सैंपल कहा से आया-
दादरी डीजीपी ने बताया कि “हमने अख़लाक़ के घर से 100 मीटर की दूरी पर, जहां अख़लाक़ को पीटा गया था, वहीं से गोश्त के सैंपल लिए थे,और अख़लाक़ कि घर से कोई भी सैंपल नहीं मिला था”.

गोश्त के कितने सैंपल टेस्ट किए गए-
अख़लाक़ के घर से 100 मीटर की दूरी से जो गोश्त लिया गया था. वही सैंपल पहले दादरी के सरकारी वेटनरी अस्पताल भेजे गए. उसके बाद अस्पताल ने नतीजे की ‘पुष्टि’ के लिए वही सैंपल मथुरा की फ़ोरेंसिक लैब भेजे.

सैंपल की जांच में क्या पता चला और जांच में इतना फ़र्क क्यों-
दादरी के अस्पताल की 29 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक ‘फ़िज़िकल एग्ज़ामिनेशन’ के बाद ये पाया गया कि ये गोश्त ‘बकरी या उसके वंश’ का है. लेकिन बाद में तीन अक्तूबर को मथुरा की फ़ोरेंसिक लैब में तकनीकी जांच के बाद इससे एकदम अलग नतीजा सामने आया और रिपोर्ट ने कहा कि गोश्त ‘गाय या उसके वंश’ का है.

उत्तर प्रदेश में इस हादसे के होने के नौ महीनो बाद भी अख़लाक़ की फैमिली इन्साफ का दरवाज़ा खटखटा रही हैं.
आपको बता दे कि राज्य में गाय, गाय क बछड़ा, बैल और सांड की हत्या करना अपराध है. हालांकि भैंस को मारा जा सकता है और उसका गोश्त खाने पर भी कोई पाबंदी नहीं है.

Web-Title: we have not taken the sample from akhlaq ‘s house

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