नई दिल्ली | केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया की नोट बंदी के बाद से 14 जुलाई तक करीब सवा 11 करोड़ रूपए के नकली नोटों का पता चला. हालाँकि नोट बंदी के दौरान करीब साढ़े 15 लाख करोड़ रूपए के नोटों का विमुद्रीकरण हुआ था. ऐसे में केवल 11 करोड़ रूपए ही नकली नोटों का पता चलना सरकार के लिए कोई बड़ी उपलब्धि नही है.

मंगलवार को राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए अरुण जेटली ने कहा की राष्ट्रिय अपराध ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार , नोट बंदी के बाद से 14 जुलाई 2017 तक सभी 29 राज्यों में 11,23,62,980 करोड़ रूपए के नकली नोटों का पता चला. इसके अलावा अरुण जेटली ने यह भी बताया की रिज़र्व बैंक ने नकली नोटों का पता लगाने और उनको जब्त करने के लिए भी एक परिपत्र जारी किया है.

इस परिपत्र में बैंक शाखाओ को भारतीय करेंसी के नकली नोटों का पता लगाने , उन्हें जब्त करने की और इस बारे में सूचना देने के लिए जिम्मेदार बनाया गया है. जेटली ने राज्यसभा में यह भी बताया की नए नोटों की विशेषताओ को देखने के लिए एक मोबाइल एप भी लांच की गयी है. इसके जरिये उपभोक्ता 500 और 2000 के नए नोटों की महात्मा गाँधी श्रंखला की विशेषताए देख सकेंगे और उनको प्रमाणिक कर सकेंगे.

इससे पहले अरुण जेटली ने उस खबर का भी खंडन किया जिसमे कहा गया था की सरकार ने पुराने नोटों को बदलने का एक और मौका देने का फैसला किया है. इस पर जेटली ने कहा की सरकार ऐसा कोई मौका नही दे रही है. क्योकि इससे नोट बंदी का उद्देश्य ही खत्म हो जायेगा. आपको बताते चले की मोदी सरकार ने नोट बंदी की घोषणा करते समय कहा था की इससे देश से कालाधन और नकली नोटों को खत्म करने में सहायता मिलेगी.


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