रविवार को एक कार्यक्रम में चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर ने जजों की कम संख्या के मुद्दे को उठाया. पीएम मोदी भी उसी कार्यक्रम में मोजूद थे. चीफ जस्टिस के सवाल का जवाब देते हुवे पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘कोर्ट की छुट्टियों’ में कटौती की सलाह दे डाली. इस पर जस्टिस ठाकुर ने जवाब देते हुए कहा कि ‘गर्मियों की छुट्टियों के दौरान जज मनाली नहीं जाते हैं, वे संवैधानिक बेंच के फैसलों को लिखते हैं. जब एक साइड तैयार होता है तो दूसरा नहीं होता. बार से पूछिए क्या वह तैयार हैं.’

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गोरतलब हैं कि रविवार को मुख्य न्यायाधीशों के एक कार्यक्रम में चीफ जस्टिस ने भावुक होकर पीएम मोदी से देश में न्यायिक सुधार की अपील की थी. साथ ही उन्होंने जजों के खाली पद भरने और जजों ककी संख्या बडाने पर जोर दिया था. चीफ जस्टिस ने अमेरिका की न्यायिक प्रणाली का हवाला देते हुवे कहा था कि भारत में एक जज साल में औसतन 2600 केस देखता है, वहीं अमेरिका में एक जज महज़ 81 केस सुनता है। उन्होंने पीएम से विनती करते हुवे कहा था ‘यह देश के विकास के लिए है इसलिए मैं आपसे विनती करता हूं. आप पूरा बोझ न्यायपालिका पर नहीं डाल सकते.

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