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बुलेट ट्रेन का सपना दिखाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रेलवे प्लेटफॉर्म पर पीने के लायक पानी भी नहीं उपलब्ध करा पा रहे हैं. इस बात का खुलासा खुद रेलवे की रिपोर्ट में हुआ हैं.

दरअसल हाईकोर्ट में रेलवे में प्लेटफॉर्म और रेलवे कर्मचारियों की दिए जाने वाले पेजयल के संबंध में याचिका लगाई गई थी, जिसमें रेलवे से पेयजल की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी गई थी. इस रिपोर्ट में  खुलासा हुआ हैं कि रेलवे प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले पानी में हानिकारक बैक्टीरिया की मात्रा अनुमान से ज्यादा है, जो पेट से संबधित बीमारियां बढ़ा सकते हैं. इसमें विशेषकर उत्तरप्रदेश के स्टेशनों को शामिल किया गया हैं.

रेलवे के मुताबिक पानी के 100 मिलीलीटर सैम्पल में 10 यूनिट से ज्यादा थर्मोटॉलरेंट कोलिफॉर्म बैक्टीरिया (टीसीबी) पाए गए हैं, जो कि पीने योग्य पानी की मात्रा से कहीं ज्यादा है. इंडियन रेलवे मेडिकल मेन्युअल (आईआरएमएम) के मुताबिक 10 टीसीबी यूनिट तक बैक्टीरिया की उपस्थिति सामान्य मानी जाती है.

भारतीय मानक ब्यूरो के मुताबिक मौजूदा टीसीबी लेबल से पेट में ऐंठन, डायरिया, पेचिश जैसी बीमारियां हो सकती है. इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, तो ऐसे में ऐसा दूषित पेयजय उन्हें जल्दी प्रभावित करता है. डॉक्टरों के मुताबिक प्लेटफॉर्म के गंदे पानी के कारण डिहाइड्रेशन से व्यक्ति की जान भी जा सकती है.


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