जस्टिस दीपक मिश्रा और एसके सिंह ने सरकार से कहा कि अश्‍लीलता और अनुमति के बीच एक लाइन होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्‍ड पॉर्नोग्राफी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार से कड़े कदम उठाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि अभिव्‍यक्ति की आजादी चाइल्‍ड पॉर्नोग्राफी पर लागू नहीं होती है। बच्‍चाें को इसका शिकार नहीं बनाया जा सकता। देश फ्रीडम ऑफ स्‍पीच के नाम पर बच्‍चों का प्रयोग सहन नहीं कर सकता। कोर्ट की यह टिप्‍पणी सरकार के उस बयान के बाद आई जिसमें उसने कहा था कि निजता के अधिकार के चलते वह ऐसा नहीं कर सकती। इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्‍पणी करते हुए कहा, ‘निजता क्‍या होती है। कोर्इ भी ऑनलाइन नहीं दिखना चाहता।’

जस्टिस दीपक मिश्रा और एसके सिंह ने सरकार से कहा कि अश्‍लीलता और अनुमति के बीच एक लाइन होनी चाहिए। जस्टिस सिंह ने कहा, ‘कुछ लोगों को माेनालिसा में भी अश्‍लीलता नजर आती है। कला और अश्‍लीलता के बीच बंटवारे की लाइन तो होनी ही चाहिए। यह मुश्किल काम है लेकिन ऐसा होना आवश्‍यक है।’ सरकार ने कोर्ट से कहा कि इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। वह चाइल्‍ड पॉर्नोग्राफी चलाने वाली साइटों को ब्‍लॉक करने के प्रति सं‍कल्पित है। हालांकि सरकार ने कहा कि वह एडल्‍ट पॉर्न साइटों पर बैन नहीं लगा सकती। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि अगली सुनवाई पर वह इस मुद्दे पर एक एफिडेविट फाइल करे। मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी। (Jansatta)


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