देहरादून | उत्तराखंड में पिछले साल कई विधायक बागी होकर कांग्रेस से बीजेपी में चले गए थे. इनमे से कुछ लोगो ने बीजेपी के टिकेट पर विधानसभा चुनाव जीता और सरकार में मंत्री बन गए. लेकिन कहते है की आपका भूतकाल कभी आपका पीछा नही छोड़ता. यह कहावत बीजेपी सरकार के दो मंत्रियो और कुछ विधायको पर सटीक बैठती है. दरअसल अदालत ने एक पुराने मामले में दो कैबिनेट मंत्रियो के खिलाफ वारंट जारी किये है.

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और सुबोध उनियाल के खिलाफ वारंट जारी किये है. इसके अलावा विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, ब्रहमस्वरूप ब्रहमचारी, ट्विकल अरोड़ा, सतपाल ब्रहमचारी समेत कई और लोगो के खिलाफ भी वारंट जारी किये गए है. सभी लोगो पर जाम लगाने , लोगो को धमकाने और पुलिस पर पथराव करने का आरोप है.

दरअसल 2009 में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए हरक सिंह रावत के नेतृत्व में करीब 6 हजार लोगो ने देहरादून के रिस्पना पुल पर प्रदर्शन किया था. इस दौरान इन पर आरोप है की इन्होने सड़क पर जाम लगाकर जनता को परेशान किया, आने जाने वाले लोगो को धमकाया और पुलिस कर्मियों के साथ धक्का मुक्की कर उन पर पथराव भी कराया गया. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान करीब 15 पुलिस कर्मी घायल हुए थे जिसमे कुछ महिला पुलिस कर्मी भी शामिल थी.

पुलिस का आरोप था की इलाके में धारा 144 लागू होने के बावजूद नेताओं ने भीड़ इकठ्ठा की और कानून का उलंघन किया. प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने अपने समर्थको को भी भड़काया जिसके बाद उन्होंने न केवल पुलिस के साथ धक्का मुक्की की बल्कि उन पर पथराव भी किया. पिछले कई सालो से यह मामला अदालत में चल रहा है लेकिन हर बार नेताओं की अनुपस्तिथि के कारण इस पर सुनवाई नही हो सकी.

हालाँकि कई बार विधायको ने मुकदमा वापसी की भी मांग की लेकिन अदालत ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया. कांग्रेस सरकार के दौरान तो सभी मुक़दमे वापिस लेने का आदेश भी दे दिया गया था. लेकिन उस समय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजीव कुमार ने सरकार के उस आदेश को यह कहकर ख़ारिज कर दिया था की इससे जनता में सही सन्देश नही जायेगा.


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