गुजरात और हिमाचल प्रदेश में VVPAT के साथ चुनाव कराने लेकर आनाकानी कर रहे निर्वाचन आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा है कि अगर आपके पास 87 हजार VVPAT मशीने हैं तो उन्हें गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा सकता है ? जिस पर तमाम मशीन वर्किंग कंडीशन में नहीं है और अभी पर्याप्त संख्या में मशीनों का अभाव है.

ऐसे में अब आयोग द्वारा गठित समिति एक लोकसभा या विधानसभा सीट के 4-5 पोलिंग स्टेशनों पर ही पेपर स्लिप्स की गिनती के पक्ष में है. हालंकि इस नए सिस्टम के कारण अब चुनावी नतीजों में थोड़ी देरी भी हो सकती है.

एक अधिकारी का कहना है कि अगर इन पर्चियों की गिनती पहले होती है, तो नतीजों का पहला रुझान 11 बजे के बाद ही आ पाएगा जबकि अभी तक EVM से गिनती होती थी तो शुरुआती आधे से एक घंटे के भीतर ही रुझान आने शुरू हो जाते थे.

अधिकारी के मुताबिक अगर रुझान या रिज़ल्ट आने में देरी होती है तो यह दोनों प्रतिद्वंदी उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच झगड़े हो सकता है.

 


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