नई दिल्ली | पिछले कुछ महीनो में देश के अन्दर गौरक्षको की गुंडागर्दी की कई वारदात सामने आई है. ज्यादातर मामलो में या तो मुस्लिम या फिर दलित समाज के लोगो को ही निशाना बनाया गया है. इन घटनाओ में कुछ लोगो को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा है. जिसके बाद से पुरे देश में कथित गौरक्षको की गुंडागर्दी के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही करने की मांग उठने लगी है. इसी बीच पीएम मोदी ने भी इन लोगो को कड़ी चेतावनी दी है.

अभी हाल ही में गुजरात दौरे पर आये पीएम मोदी ने कहा था की गौभक्ति के नाम पर हो रही हिंसा को किसी भी कीमत पर स्वीकार नही किया जायेगा. अगर आज महात्मा गांधी होते तो वो भी इसके खिलाफ होते. मोदी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा था की किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नही है. हमें साथ मिलकर चलना होगा तभी महात्मा गाँधी के सपनो का भारत बना सकते है.

हालाँकि कई घटनाये होने के बाद मोदी ने इन मामलो पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी. चूँकि विपक्षी दल हमेशा से यह आरोप लगाते आये है की इन गौरक्षको को बीजेपी और उससे जुड़े संगठनो का संरक्षण प्राप्त है इसलिए मोदी की चुप्पी उनके आरोप पर मोहर लगा रही थी. लेकिन मोदी द्वारा गौरक्षको को चेतावनी देना , विश्व हिन्दू परिषद् को रास नही आया. उन्होंने पीएम के बयान की आलोचना करते हुए कहा की गौरक्षा भी गौसेवा का ही भाग है.

विश्व हिन्दू परिषद् के सह महासचिव सुरेन्द्र जैन ने मंगलवार को कहा की गौपालन, गौ संरक्षण, गौ संवर्धन और गौरक्षा , ये सब गौसेवा का ही हिस्सा है. महात्मा गाँधी ने भी कहा था की बिना गौ सेवा के स्वराज की प्राप्ति नही हो सकती. इसलिए अगर देश में इसके लिए कोई कानून हो तो फिर किसी चीज की जरुरत ही नही है. गौरक्षको की गुंडागर्दी पर उन्होंने कहा की वो तानाशाह नही बल्कि पीड़ित है. यह सब उन लोगो की छवि ख़राब करने का प्रयास है.


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