नई दिल्ली | मोदी सरकार के 1 मई से लाल बत्ती पर रोक लगाने के आदेश के बाद ज्यादातर राज्यों के वीआईपी में हलचल मची हुई है. वो किसी भी हालत में वीआईपी होने का मोह नही छोड़ पा रहे है. यही कारण है की वो लाल बत्ती हट जाने के बाद कुछ ऐसे रास्ते तलाशने में लग गए है जिससे उनका वीआईपी वाला ठाठ बना रहे है. कुछ राज्यों के नेताओं ने तो इस नियम की काट ढूंढ भी ली है.

तेलंगाना और मध्यप्रदेश में नेताओं की गाडियों से लाल बत्ती को हट चुकी है लेकिन वो इसका मोह नही छोड़ पा रहे है. इसलिए खुद को औरो से अलग दिखाने के लिए उन्होंने लाल बत्ती हटाकर साईरन लगा लिया है. मध्य प्रदेश में ज्यादातर नेताओं की गाडियों पर साईरन लग चुके है. कुछ ऐसा ही हाल तेलंगाना का भी है. चाहे लाल बत्ती से जनता को इतनी परेशानी न हो लेकिन साईरन लगने से लोगो में काफी नाराजगी है.

इसके अलावा पुलिस , एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और कंस्ट्रक्शन का सामान ले जा रही गाडियों के अलावा किसी भी गाडी पर हूटर लगाना गैर क़ानूनी है. यह सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट के भी विरुद्ध है. इस नियम को तोड़ने वाले पर 5000 रूपए का जुर्माना लगाया जाता है. चौकाने वाली बात यह है की मध्य प्रदेश बीजेपी शासित प्रदेश है और यहाँ भी उनके नेता मोदी के फैसले की काट ढूँढने में लगे है. कुछ नेताओं ने तो अपनी गाडी पर हूटर लगा भी लिया है.

इसके अलावा दुसरे बीजेपी शासित प्रदेश महाराष्ट्र में भी यही हाल है. यहाँ तो सरकार के गृह राज्य मंत्री ने डीजीपी को आदेश दिया है की वो कुछ ऐसा रास्ता निकाले जिससे की मंत्रियो की गाड़ी लाल बत्ती न लगने के बावजूद अलग दिखाई पड़े. उनका कहना है की ऐसा मंत्रियो और नेताओं की सुरक्षा के लिए भी जरुरी है. पीएम मोदी नेताओ से अपील कर रहे है की वो दीमाग से भी लाल बत्ती निकाल दे जबकि उनके ही नेता इस नियम की काट ढूँढने में लगे हुए है.


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