vijay malya reality

ये कोई पहली बार नहीं हुआ जब किसी देश का नागरिक स्थानीय कानून से बचने के लिए पड़ोसी देश में आश्रय लिया हो। खास तौर से लंदन में ऐसे लोगों के लिए ऐशगाह बनता जा रहा है।

बैंकों के नौ हजार करोड़ से ज्यादा के बकाए से परेशान कारोबारी विजय माल्या 2 मार्च को भारत छोड़कर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि वह लंदन में हैं। इसी के साथ एक बार फिर से साबित हो गया कि ब्रिटेन भारत ही नहीं दूसरे देशों के नागरिकों के लिए बेहद मुफीद जगह है।

खास तौर से राजनीतिक और धार्मिक तौर पर उत्पीड़न से परेशान लोगों के लिए ब्रिटेन में शरण पाना बेहद आसान है। इतिहास गवाह रहा है कि ऐसे में मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिला है। 19वीं शताब्दी में समाज सुधारक सैम्युअल्स स्माइल्स ने लंदन को दुनिया की शरणगाह बताया था जहां सब देशों के सताए लोगों को शरण दी जाती है।

दशकों से ब्रिटेन में दूसरे देशों के सैकड़ों लोग शरण लेते रहे हैं। इनमें श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान के लोग तो शामिल हैं ही भारतीय भी तेजी से बढ़ रहे हैं। 1970 के दौरान युगांडा से निष्काषित ईदी अमीन को भी शरण मिली थी।
ब्रिटेन ने पहले की अपेक्षा अब दूसरे देशों के शरणार्थियों को शरण की शर्तें पहले से और सख्त कर दी है। बावजूद इसके अभी भी लोगों में ब्रिटेन को लेकर नजरिया बिल्कुल अलग है।

हाल के वर्षों में देखें तो हाईप्रोफाइल अपराधियों और अमीरों ने खुद को बचाने के लिए यहां का आश्रय तो लिया साथ ही पैसों के बल पर शांतिपूर्वक जिंदगी बिता रहे हैं। इनमें रुस के भी लोग शामिल हैं।

भारत और ब्रिटेन के बीच दिसंबर 1993 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुआ था। इसके बावजूद शायद ही ऐसा कोई मामला सामने आया हो जब किसी व्यक्ति को भारत प्रत्यर्पित किया गया हो। साल 2008 में भारत ने हन्ना फोस्टर की हत्या के एक मामले में मनिंदर पाल सिंह कोहली को ब्रिटेन प्रत्यर्पित किया था।

वित्तीय गड़बड़ियों के चलते भारत से भागने वालों में माल्या और ललित मोदी का नाम शुमार है। इसके साथ-साथ कई और नाम हैं जिन्होंने खुद को बचाने के लिए लंदन भागना मुनासिब समझा। इनमें भारतीय नौसेना वार रूम लीक मामले में आरोपी रविशंकरन का नाम भी है।

इसके अलावा गुजरात में 1993 में हुए दो बम धमाका मामलों में आरोपी टाइगर हनीफ, गुलशन कुमार की हत्या मामले आरोपी नदीम सैफी समेत कई मामले हैं जिन्होंने खुद को बचाने के लिए लंदन को अपनी पनाहगाह बनाया है।

ब्रिटेन के नागरिक रेमंड वार्ले ने गोवा में बच्चों का शारीरिक शोषण किया, हालांकि उस कार्रवाई होती उससे पहले ही वह भारत से फरार हो गया। भारतीय कानून के मुताबिक इनकी तलाश भारत को है। लेकिन ब्रिटेन में आश्रय लेने की वजह से भारत इन पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।


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