असहिष्‍णुता पर विवादास्‍पद बयान देने वाले बॉलीवुड एक्‍टर आमिर खान पर इस बार केंद्रीय विकास मंत्री वेंकैया नायूड ने निशाना साधा है. एमआईटी कॉलेज में छठे भारतीय छात्र संसद सम्‍मेलन में वेंकैया नायडू ने कहा, ‘आमिर खान मेरे दोस्‍त की तरह हैं. हालांकि, जिस तरह आमिर ने अपनी बात कही, उससे ना केवल मेरी, बल्कि देश की भावनाओं को चोट पहुंचाई.’

‘आखिर असहिष्‍णुता क्‍या है?: 

संसद नहीं चलने देने की विपक्ष की रणनीति पर भाजपा नेता ने कहा, संसद तीन ‘डी’ से चलती है ‘डिस्‍कस’ (बातचीत), ‘डिबेट’ (बहस) और ‘डिसाइड’ (निर्णय). अब उसमें चौथा ‘डी’ ‘डिसरप्‍ट’ (बाधा) जुड़ गया है. ऐसा नहीं होना चाहिए. कुछ खास लोगों या राजनीतिक दलों को संसद बाधित करने का अधिकार नहीं है.

कितना सही था आमिर का बयान?: गौरतलब है कि आमिर ने कहा था कि देश का माहौल ठीक नहीं है. बढ़ती असहिष्णुता की वजह से उनकी पत्नी किरण राव ने उनसे पूछा था कि क्या उन्हें देश छोड़ देना चाहिए. वह अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं.

बाद में आमिर ने सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया. उन्‍होंने कहा कि वे भारत में जन्‍मे हैं और यहीं मरना पसंद करेंगे.

देशभर में बहस: इसके बाद आमिर के बयान को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई थी. कुछ लोगों ने उसका समर्थन किया है तो कुछ ने इसके लिए उनकी कटु आलोचना की है. इससे पहले अभिनेता शाहरुख खान भी ‘असहिष्णुता’ को लेकर अपने बयान के बाद विवादों में घिर गए थे.

इसके बाद असहिष्णुता के मुद्दे पर देश में छिड़ी बहस के बीच प्रख्यात लेखक व गीतकार जावेद अख्तर का कहना था कि भारत हमेशा एक सहिष्णु देश बना रहेगा. अख्तर ने कहा था, ‘समाज के कुछ वर्गो में असहिष्णुता की कुछ घटनाएं हुई हैं, लेकिन भारत हमेशा सहिष्णु रहेगा.’

नायडू ने तीखे तेवर में पूछा, ‘आखिर असहिष्‍णुता क्‍या है? क्‍या भारी बहुमत से निर्वाचित प्रधानमंत्री को अस्‍वीकार करना असहिष्‍णुता नहीं है? क्‍या दूसरे समुदाय की भावनाओं का आदर नहीं करना असहिष्‍णुता नहीं है?’ (news18)


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