इलाहबाद | सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद और संजय गाँधी के पुत्र वरुण गाँधी आजकल मोदी सरकार से खफा खफा नजर आते है. ज्यादातर मौको पर वो अपनी ही सरकार की खिंचाई करने से परहेज नही करते. यही कारण है की बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें पार्टी से भी अलग थलग किया हुआ है. यहाँ तक की उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावो में उनको स्टार प्रचारको की सूची में भी जगह नही दी गयी.

लेकिन वरुण गाँधी फिर भी अपने रुख पर कायम है. उन्होंने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए, उधोगपतियो के ऋण माफ़ करने पर सवाल उठाये. बुधवार को इलाहबाद उच्च न्यायलय बार एसोसिएशन द्वारा न्यायलय परिसर में एक संगोष्टी का आयोजन किया गया. ‘न्याय का वास्तिवक अर्थ’ नामक इस संगोष्ठी में वरुण गाँधी को मुख्य वक्ता के तौर पर बुलाया गया.

संगोष्ठी में बोलते हुए वरुण गाँधी ने कहा की साल 2001 से अब तक देश की अलग अलग सरकारों ने करीब तीन लाख करोड़ रूपए का ऋण माफ़ किया है. इनमे से करीब दो लाख करोड़ रूपए से ज्यादा का कर्ज देश के करीब 30 शीर्ष उधोगपतियो के ऊपर बकाया था. क्या हम इसे न्याय कहते है? जहाँ देश की एक प्रतिशत आबादी, देश के आधे से अधिक संसाधनों को नियंत्रिक करती हो वहां न्याय की बात खोखली प्रतीत होती है.

वरुण ने विदेशी पूंजी निवेश के लिए सरकारी नीतियों पर भी सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा की जब तक देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को उसका हक़ नही मिलेगा तब तक हमारा देश महान नही बन सकता. केवल विदेशी पूंजी निवेश से कुछ नही होने वाला. आज भी इस देश में एक तिहाही से अधिक आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है. आज भी करीब 90 लाख बच्चे मजदूरी करने को मजबूर है. कर्ज के बोझ में दबकर किसान आत्महत्या कर रहे है.


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

अभी पढ़ी जा रही ख़बरें

SHARE