केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने चौथे विश्व उर्दू सम्मेलन के समापन समारोह में हिस्सा लेते हुए उर्दू को हिन्दुस्तान की भाषा करार दिया हैं.

उन्होंने कहा कि उर्दू बहुत ही प्यारी और मीठी भाषा है. यह किसी खास मजहब की नहीं, बल्कि सबकी भाषा है. असल में बहुत सी हिंदुस्तानी भाषाओं के मेलजोल से जो हिंदुस्तानी भाषा वजूद में आई उसका नाम उर्दू है. प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अमीर खुसरो के कलाम से जो कुछ भी वजूद में आया है वह आज तक हम पढ़ते और सुनते हैं. वर्तमान में हमें उर्दू भाषा में अधिक से अधिक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराने की जरूरत है.

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राष्ट्रीय उर्दू कौंसिल (NCPUL) के कार्यो की तारीफ करते हुए जावड़ेकर ने कहा कि अगर परिषद् उर्दू के विकास के लिए कोई ठोस प्रस्ताव पेश करती तो सरकार उस पर गंभीरता से विचार करेगी. उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न मात्री और क्षेत्रीय भाषा, विभिन्न धर्म, अलग रहन-सहन के बावजूद अनेकता में एकता को सही साबित करते हुए पूरे देश का एकजुट होना ही भारत की पहचान है, जिस पर देश को गर्व है.

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विश्व उर्दू सम्मेलन के अंतिम दिन आयोजित सत्र में कनाडा से आए जावेद दानिश ने उर्दू के विकास के लिए सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि विदेश में उर्दू को बढ़ावा देने के लिए गालिब चेयर की स्थापना की जानी चाहिए. डिजिटल दुनिया में उर्दू को और बेहतर बनाने की जरूरत है. राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के निदेशक प्रो. इरतजा करीम ने कहा कि परिषद उर्दू के विकास के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी। देश विदेश से आए उर्दू विद्वानों ने अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए.

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