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स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त, भारत की आज़ादी का दिन. भारत के इतिहास का ऐसा दिन जब देश के नागरिको ने आज़ादी का सूरज उगते हुए देखा. 15 अगस्त 1947 को सभी भारतीय अंग्रेज़ो की गुलामी से आज़ाद हो गए थे, आज का दिन तिरंगा फहराते हुए और राष्ट्रगान पढ़ने के साथ शुरू होता हैं.

आज 70वे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर AMU मलप्पुरम केंद्र में एक उत्सव आयोजित किया गया. केंद्र के डायरेक्टर के पद पर नियुक्त हुए प्रोफेसर टी साथीसन ने इस मौके पर स्वतंत्रता सेनानियो को याद करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन के कुछ विशेष भाग को सामने रखा.

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प्रोफेसर ने अपने विचारो को प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह हमारी ज़िम्मेदारी बनती हैं कि “हम इस देश को नए विचारों और शोध की सहायता से सही दिशा में ले जाये. हम ऐसा सिर्फ कड़ी मेहनत और मज़बूत इरादों के साथ कर सकते हैं, और हमको इस विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैय्यद अहमद खान से प्रेरणा हासिल करनी चाहिए, और सर सैय्यद अहमद खान की इस विरासत आगे लेकर जाने चाहिए.”

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इस अवसर पर कानून विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर शाहनवाज़ अहमद मालिक ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता के नाम पर हो रहे खिलवाड़ पर फोकस करते हुए कहा कि “मौलिक अधिकारों के संरक्षण की गारन्टी के बिना हम अपने आपको स्वतंत्र नहीं कह सकते हैं. जब तक दलित, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग सुरक्षित नहीं भारत वास्तव में आजाद नहीं, वास्तव में भारत को एक स्वतंत्र राज्य बनाने के लिए दलितों के संवैधानिक अधिकारों, पिछड़ा वर्ग के अधिकारों और दुसरे कमज़ोर समुदाय के अधिकारों को मज़बूत बना संरक्षित करना होगा.”

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वही इस मौके पर मौजूद कानून विभाग के कोऑर्डिनेटर डॉ. फैसल के.पी ने चेतावनी देते हुए कहा कि बार-बार अतीत को याद कर चिंताजनक हैं, यक़ीनन अतीत में हुई घटनाओ से हमको सीखने को मिलता हैं लेकिन अतीत के बारे में चिंता कर हमको भविष्य के रास्तो को बंद नहीं करना चाहिए. हमारे डिजाईन और योजनाए भविष्य में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शक होनी चाहिए. यही सही वक़्त हैं कि आपसी मन-मुटाव को खत्म कर एक ऐसा वातावरण बनाये जहा सभी लोग शांति से रह सके.

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