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नई दिल्ली, 15 नवम्बर। समान नागरिक संहिता के विरोध में ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम इस शुक्रवार यानी 18 नवम्बर को संसद कूच करेगी। पार्लियामेंट मार्च के नाम से पहले जंतर मंतर पर विशाल प्रदर्शन होगा, इसके बाद संसद की तरफ़ कूच किया जाएगा। दिल्ली के प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में तंज़ीम के अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि भारत का मुसलमान अपने निजी क़ानूनों में दख़ल को बर्दाश्त नहीं करेगा और भारतीय जनता पार्टी की सरकार जिन राजनीतिक लक्ष्यों की ख़ातिर मुसलमानों को मोहरा बना रही है, उसका आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उचित जवाब दिया जाएगा।

पत्रकारों के सवालों के जवाब में मुफ़्ती अशफ़ाक़ ने कहाकि तंज़ीम में एक लाख सुन्नी सूफ़ी उलेमा और क़रीब दस लाख सूफ़ी आम नागरिक सदस्य हैं। इन लोगों की राय है कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे पर देश को धकेलना चाहती है जिसके वृहद राजनीतिक लक्ष्य हैं। सुन्नी मुसलमान केन्द्रीय क़ानून आयोग की उस मंशा पर विरोध जता रहे हैं जिसमें जनता से यह राय माँगी गई थी कि क्या भारत में तीन तलाक़ को ग़ैर क़ानूनी घोषित किया जाए। सुन्नी मुसलमानों को लगता है कि भारत में मुसलमानों की 90 प्रतिशत जनता जिस हनफ़ी व्याख्या में विश्वास करती है, केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार उसे हटाकर देश को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे पर धकेलना चाहती है।

18 नवम्बर को संसद कूच- मुफ़्ती अशफ़ाक़ क़ादरी

भारत में सुन्नी मुसलमानों की प्रतिनिधि सभा और सुन्नी उलेमा की सबसे बड़ी तंज़ीम ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम के अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि इस शुक्रवार की जुमे की नमाज़ के बाद 3 बजे दिल्ली के हज़ारों लोग जंतर मंतर पर जुटकर मोदी सरकार के समान नागरिक संहिता थोपने का विरोध करेंगे और इसके बाद अपना ज्ञापन सौंपने के लिए संसद की तरफ़ कूच करेंगे। अपने ज्ञापन में तंज़ीम माँग करेगी कि भारत के सुन्नी मोदी सरकार के उस प्रस्ताव के विरोधी हैं जिसमें महिला सुरक्षा के नाम पर इस्लामी शरीअत में बदलाव की कोशिश की जा रही है।

सुन्नी निजी क़ानूनों की सुरक्षा के लिए आगे आएं- नक़्शबंदी

दरबार अहले सुन्नत के प्रमुख सैयद जावेद नक़्शबंदी ने कहाकि दिल्ली समेत भारत के सभी सु्न्नी अवाम को चाहिए कि वह शुक्रवार 18 नवम्बर को जुमे की नमाज़ के बाद जंतर मंतर तक पहुँचे ताकि वह अपने निजी क़ानूनों की सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम और दरबार अहले सुन्नत की कोशिशों को ताक़त दे सके। नक़्शबंदी ने कहाकि यह आवश्यक है कि मुसलमान अपने अधिकारों के लिए आगे आएँ और तंज़ीम के हाथ मज़बूत करें।

नजीब और फ़िलस्तीन की भी बात होगी- शुजात क़ादरी

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव शुजात अली क़ादरी ने कहाकि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से लापता छात्र नजीब की तलाश, नजीब के साथ ज्यादती करने वाले दोषियों की गिरफ़्तारी की मांग को भी 18 नवम्बर के जंतर मंतर से संसद तक कूच में उठाया जाएगा। उन्होंने कहाकि उनका युवा संगठन और तंजीम  इज़राइल के राष्ट्रपति रिवलिव रिविन के भारत दौरे का विरोध करता है और स्वतंत्र फ़िलस्तीन राष्ट्र की अपनी माँग को दोहराता है। संसद कूच से दिए जाने वाले ज्ञापन में इन मुद्दों को शामिल किया जाएगा।

देश संविधान से चलेगा, संघ से नहीं-हाजी शाह मुहम्मद

आशिक़े रसूल फ्रंट के नेता हाजी शाह मुहम्मद ने कहाकि भारत संविधान से चलेगा, भारत को जो लोग संघ की शाख़ा से चलाना चाहते हैं, वह ग़लतफ़हमी में ना रहें। उन्होंने कहाकि सूफ़ी मुसलमान हनफ़ी व्याख्या के अनुसार अपने निजी क़ानूनों को मानने के लिए राज़ी हैं।

आपको बता दें कि इससे पहले तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम समेत भारत के प्रतिष्ठित सुन्नी सूफ़ी संगठनों ने पिछली 17 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर मंतर और 28अक्टूबर को दिल्ली के सीलमपुर में समान नागरिक संहिता के विरुद्ध ज़ोरदार प्रदर्शन किया था और क़ानून आयोग को अपनी सिफ़ारिशों से पहले ली जाने वाली राय को इस्लाम के ख़िलाफ़ साज़िश बताते हुए इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे पर देश को धकेलने की नीयत बताया था।


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