प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट का सबसे चर्चित चेहरा है स्मृति ईरानी. स्मृति ईरानी उस वक्त सुर्खियों में आई जब उन्होंने राहुल गांधी को अमेठी में जबरदस्त चुनावी टक्कर दी. 2014 में लोकसभा का ये चुनाव तो स्मृति हार गई फिर भी उन्हें बीजेपी की सरकार में सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर मानव संसाधन जैसा अहम मंत्रालय सौंप दिया गया.

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देश उन्हें टेलीविजन की सबसे मशहूर बहू के तौर पर भी जानता है. छोटे परदे पर तुलसी के किरदार से देश के बड़े पद तक पहुंचने वाली स्मृति ईरानी ने जिंदगी में संघर्ष के कई मुकाम देखे हैं. कम उम्र में नौकरी करके अपना आर्थिक बोझ खुद उठाने वाली स्मृति ईरानी ने ग्लैमर की चकाचौंध से पहले रेस्त्रां के फर्श भी चमकाएं हैं. मॉडलिंग के रैंप से लेकर टेलीविजन की दुनिया तक स्मृति ने जिंदगी के कठोर सबक सीखें हैं. टीवी के छोटे परदे पर बड़ी कामयाबी के बाद जब स्मृति ने राजनीति की दुनिया का रुख किया तो यहां भी कामयाबी ने उनके कदम चूम लिए. यूं तो मंत्री बनने के बाद से ही स्मृति ईरानी विवादों को लेकर चर्रा में रही हैं. लेकिन बजट सत्र में अपने तीखे भाषण के बाद एक बार फिर वो चर्चा के केंद्र में आ गई है.

बजट सत्र के दूसरे दिन बुधवार को राज्यसभा और लोकसभा में छात्र रोहित वेमुला आत्महत्या मामले और जेएनयू में देशविरोधी नारेबाजी के मुद्दे पर हंगामेदार बहस हुई. दलित स्टूडेंट रोहित वेमुला के सुसाइड के मुद्दे पर पहले स्मृति ईरानी और मायावती आमने-सामने नजर आईं. शाम को लोकसभा में स्मृति ईरानी कई बार भावुक हो गईं. दरअसल जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारों और रोहित वेमुला को लेकर विपक्ष लगातार स्मृति ईरानी पर हमले बोल रहा है.

विपक्ष का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री बंगारु दत्तात्रेय ने स्मृति ईरानी को लिखी अपनी चिट्ठी में हैदाराबाद यूनिवर्सिटी में देश विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाने की बात कही थी. विपक्ष का आरोप है कि स्मृति ईरानी के दबाव की वजह से यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 21 दिसंबर को दलित छात्र रोहित वेमुला के हॉस्टल में आने पर पाबंदी लगा दी थी जिसके बाद रोहित वेमुला ने 17 जनवरी को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय की चिट्टी पर कार्रवाई की इसी बात पर स्मृति ईरानी ने एक एक कर विपक्षी सांसदों की चिट्टियों को सामने रख कर एक तरह से इस मुद्दे पर पलटवार कर दिया.

स्मृति ईरानी ने लोकसभा में राहुल गांधी पर भी जम कर हमला बोला. जेएनयू स्टूडेंट्स को सपोर्ट कर रहे राहुल गांधी के लिए उन्होंने कहा, “सत्ता तो इंदिरा गांधी ने भी खोई थी. लेकिन उनके बेटे ने कभी भारत की बर्बादी के नारों का समर्थन नहीं किया था.”

स्मृति ने कहा, “राहुल कहते हैं, ‘आओ स्मृति ईरानी! हम चलकर जेएनयू स्टूडेंट्स से कहें कि जिस भारत के विरोध में तुम नारे दे रहे हो, जिस तिरंगे को लहराने में तुम्हे शर्म आती है, उसी भारत के लिए जेएनयू के भी कुछ स्टूडेंट्स ने अपनी कुर्बानी दी है, उनके खिलाफ नारे मत लगाओ’ तो कुछ बात होती.”

एचआरडी मिनिस्टर ने कहा, “600 स्टूडेंट्स तेलंगाना मूवमेंट में मारे गए. राहुल क्या कभी गए? कभी नहीं गए. लेकिन इस मामले में उन्हें राजनीतिक मौका नजर आया. इस मामले का राजनीतिक फायदे के लिए आप लोगों ने इस्तेमाल किया.”

स्मृति ईरानी के मानव संसाधन विकास मंत्री बनने के बाद से ही विपक्षी दल उन पर ये आरोप लगाते रहे हैं कि वो राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के इशारे पर किताबों और शिक्षा संस्थानों में फेरबदल करती रही है ताकि शिक्षा संस्थानों में आरएसएस के हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके. इन तमाम आरोपों पर भी स्मृति सदन में जमकर बरसी.

संसद के अंदर स्मृति ईरानी के ऐसे तीखे बयानों के बाद विरोधी दलों औऱ बीजेपी के बीच अब घमासान मच गया है.

टीवी के परदे की बहू तुलसी वीरानी ने स्मृति ईरानी को एक नई पहचान दी. करीब आठ साल तक घर –घऱ में आदर्श बहू के रुप में लोगों के दिलों पर राज करने वाली स्मृति ईरानी ने साल 2003 में बीजेपी ज्वाइन कर ली थी लेकिन जिस तरह टीवी सीरियल में उन्हें अचानक तुलसी वीरानी का किरदार मिला था वैसे ही अचानक उन्होंने बीजेपी में राजनीतिक अवतार नहीं लिया था. दरअसल राजनीति से स्मृति ईरानी का रिश्ता काफी पुराना रहा है उनके पिता राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के स्वंय सेवक थे खुद स्मृति ईरानी का भी कहना है कि उनके परिवार का बीजेपी के पूर्व रुप यानी जनसंघ से गहरा नाता रहा है.

बीजेपी की स्टार प्रचारक स्मृति ईरानी साल 2004 में दिल्ली की चांदनी चौक सीट से पहली बार लोकसभा के चुनाव में उतरी थी. इस सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस के मंझे हुए नेता कपिल सिब्बल के साथ था. बीजेपी लोकसभा का ये चुनाव तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में लड़ रही थी लेकिन इस चुनाव में बीजेपी की हार हुई और स्मृति ईरानी भी चांदनी चौक सीट से चुनाव हार गई थी.

दिल्ली की चांदनी चौक सीट से चुनाव हारने के बाद के अगले दस सालों में स्मृति ईऱानी ने बीजेपी से कभी अपने कदम वापस पीछे नहीं खींचे. यहीं वजह है कि वो पार्टी संगठन में तेजी से तरक्की की सीढि़यां चढती चली गई. साल 2010 में वो बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनी और 2013 में उन्हें बीजेपी का उपाध्यक्ष भी बनाया गया था.

मानव संसधान विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि इन पांच सालों में पार्टी ने देखा कि मैने कभी अपने आप को सिर्फ कैंपेन तक सीमित नहीं किया. मुद्दो पर ना सिर्फ बातें की, सभाएं की बल्कि पालिटिकल डिबेट में भाग भी लिया. साथ ही संगठन को कैसे मजबूत किया जाए उस विषय पर भी मैने काम किया. औऱ उसी के चलते पार्टी धीरे धीरे मेरी जिम्मेदारी बढा रही है.

बीजेपी नेता विजय गोयल ने बताया कि मुझे लगता है कि पालिटिक्स उनके खून में थी. और क्योंकि उनके पिता रहे संघ में और मां जनसंघ में रही. इसीलिए वो टिकी रही और टिक कर उन्होंने आज अपना स्थान बना लिया है. तो जो मैं उनके गुण देखता हूं उनके गुणों में ये है कि वो मेहनती बहुत हैं. दूसरी बात उनके पास विजन है. और जब वो बोलती है तो बडी क्लेरिटी से बोलती हैं और सबजेक्ट की उनको नॉलेज रहती है केवल बोलने के लिए नहीं बोलती सब्जेक्ट की उनको नालेज होती है.

स्मृति ईरानी साल दर साल बीजेपी में तरक्की करती चलीं गईं थीं जब 2011 में स्मृति ईरानी को गुजरात से राज्यसभा सांसद चुना गया था. 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के हाथों चुनाव हारने के बावजूद उन्हें बीजेपी सरकार में मानव संसधान विकास मंत्री बनाया गया और मंत्री बनने के बाद वो विवादों में भी घिरती रही हैं.

स्मृति ईरानी पर 2004 और 2014 के चुनावों में अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर झूठे हलफनामें देने के भी आरोप लग चुके हैं औऱ उनके येल यूनिवर्सिटी की डिग्री होने के दावे पर भी सवाल खड़े किए गए हैं. उनको लेकर विवादों में एक कड़ी तब और जुड़ गई थी जब दिल्ली यूनिवर्सिटी के ओपन स्कूल ऑफ लर्निंग से उनके शैक्षणिक दस्तावेज लीक होने के मामले में पांच कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया. दिल्ली यूनीवर्सिटी के चार साल के डिग्री कोर्स को वापस तीन साल में बदलने को लेकर जहां वो विवादों में रही हैं वहीं उन पर ये आरोप भी लगा है कि वो आईआईटी के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए भी यूजीसी का सहारा ले रही हैं. स्मृति ईरानी पर ये भी इल्जाम लगते रहे हैं कि वो राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रभाव में आकर शिक्षा के भगवाकरण की तरफ बढ़ रही है. और जेएनयू में देशविरोधी नारेबाजी और दलित छात्र रोहित वेमुला आत्महत्या केस उनसे जुड़े सबसे ताजा विवाद हैं.

स्मृति ईरानी आज देश की सबसे चर्चित औऱ विवादित मंत्री हैं और अब उनकी पहचान टीवी की बहू तुलसी वीरानी की बजाए बीजेपी की एक ऐसी कद्दावर नेता के तौर पर होने लगी है जो देश का एक अहम औऱ बड़ा मंत्रालय संभाल रही है. (ABP)


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