नई दिल्ली  भारत में बेशक देशद्रोह का कानून अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा हो, मगर ब्रिटेन ने खुद अपने यहां 2009 में इसे क्रिमिनल ऑफेंस मानने से इनकार कर दिया था। इसे पुराने जमाने का प्रतीक माना गया जहां अभिव्यक्ति की आजादी उस तरह का अधिकार नहीं था, जैसा कि आज है।

 ब्रिटेन फेंक चुका, भारत क्यों ढो रहा देशद्रोह कानून? (फाइल ...

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, देशद्रोह का कानून कोरोनर्स ऐंड जस्टिस ऐक्ट 2009 लाकर खत्म किया गया था। यह गॉर्डन ब्राउन की लेबर सरकार के समय में किया गया था। इसके तहत तीन चीजों को खत्म किया गया।

पहला, देशद्रोह के अपराध, मानहानि और अश्लील प्रकृति के अपराध। तब कानून को लागू करने के मौके पर सरकार की तरफ से कहा गया था कि अभिव्यक्ति की आजादी आज लोकतंत्र की पहली जरूरत मानी जाती है।
लोगों को सरकार की आलोचना का अधिकार हो, यह आजादी को बरकरार रखने के लिए बेहद जरूरी है। यही नहीं ब्रिटेन के लॉ कमिशन ने साल 1977 में ही देशद्रोह कानून को खत्म कर देने की सिफारिश की थी। (नवभारत टाइम्स)


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