तुर्की राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगान भारत पहुँच चुके हैं. उनके साथ उनकी पत्नी एमीन एर्दोगान, मंत्रिमंडल के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और 150 सदस्यों का एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जो भारत-तुर्की व्यापारिक फोरम की एक बैठक में हिस्सा लेगा.

एर्दोगान ने भारत आने से पहले कश्मीर के मसले पर भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश भी की. एर्दोगान की यात्रा से उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में भारत की सदस्यता को लेकर भी बातचीत हो सकती है.

एर्दोगान भारत के साथ पाकिस्तान के भी एनएसजी में शामिल होने का समर्थन कर सकते हैं. उन्होंने कहा था कि भारत को इसमें कोई एतराज नहीं होना चाहिए. राजनयिक सूत्रों के मुताबिक तुर्की भारत की एनएसजी में सदस्यता का सीधे विरोध नहीं करता लेकिन वह पाकिस्तान के एनएसजी में शामिल होने का समर्थन करता है.

एर्दोगान ने नवाज शरीफ को अपना अजीज मित्र बताते हुए कहा था, मैं उनसे लगातार कश्मीर मसले पर चर्चा करता रहता हूं. मैं उन्हें जानता हूं, वह अच्छी नीयत वाले इंसान हैं. इसलिए मुझे लगता है कि अगर हम बातचीत का सिलसिला खुला रखेंगे तो इस मसले को सुलझाया जा सकता है.


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