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केंद्र सरकार द्वारा ट्रिपल तलाक का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया जाने के बाद दरगाह आला हजरत से साफ कर दिया गया है कि मुसलमान किसी भी हाल में शरीयत का दामन नहीं छोड़ेंगे.

शनिवार को दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता एवं तहरीक तहफ्फुज-ए-सुन्नियत के महासचिव मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी ने कहा कि तीन तलाक पर मुस्लिम समाज में कोई इख्तेलाफ (आपसी विरोध) नहीं है. सभी तीन तलाक को तीन ही मानते हैं. एक बार में तीन बार तलाक कहने से तलाक हो जाएगा.

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उन्होंने आगे कहा कि एक-दो महिलाएं उकसावे में आकर इसका विरोध कर रही हैं तो उनकी आवाज को तमाम मुसलमानों की आवाज नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि जिस तरह तीन बार कुबूल-कुबूल-कुबूल कहकर एक अजनबी महिला बीवी बन जाती है, तो फिर तीन तलाक का विरोध क्यों?

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कितना ही निशाना क्यों न बना लें, मुस्लिम समाज शरई फैसलों को मानता रहा है और मानता रहेगा. साथ ही उन्होंने मुसलमानों को ह अहसास न कराएं कि मुसलमानों की मजहबी आजादी खतरे में है. उन्होंने कहा, मुसलमान दिखा देंगे कि वे मुल्क के संविधान के साथ इस्लामी शरीयत पर भरोसा रखते हैं.

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नूरी ने आगे कहा, 14-15 अक्टूबर को होने वाले उर्स-ए-नूरी में भी हुकूमत के हलफनामे के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी. जिसमे मुसलमानों को समझाया जाएगा कि तलाक के अधिकार का गलत इस्तेमाल न करें, अपने शरई मसाइल लेकर इधर-उधर न जाएं.


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