तीन तलाक को लेकर चल रही सुप्रीम कोर्ट सुनवाई अब पूरी गई है. अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की उस सलाह को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड स्वीकार किया है और कहा कि वह जल्द ही सभी काजी को यह सलाह जारी करेगा कि वे निकाहनामा में यह शामिल किया जाएगा कि दूल्हा और दुल्हन एक बार में तीन तलाक नहीं ले सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को एक सप्ताह में इस बाबत शपथपत्र देने को कहा है.

दरअसल मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने बुधवार को संवैधानिक पीठ ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से पूछा कि क्या औरतें तीन तलाक को ना कह सकती हैं? पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल से चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने सवाल किया था कि क्या महिलाओं को निकाहनामा के समय तीन तलाक को ना कहने का विकल्प दिया जा सकता है. क्या सभी काजियों से निकाह के समय इस शर्त को शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया जा सकता है?

कपिल सिब्बल ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के एक छोटी सी चिड़िया है, जिस पर गिद्ध अपनी नज़रें गड़ाये बैठा हुआ है. समुदाय के घोंसले को सुप्रीम कोर्ट का संरक्षण मिलना चाहिए. मुस्लिम समुदाय एक विश्वास के साथ कोर्ट आया है और अपने पर्सनल लॉ, परंपरा और रुढ़ियों के लिए सुरक्षा मांग रहा है. मुस्लिम समुदाय का सुप्रीम कोर्ट पर पिछले 67 वर्षों से विश्वास है.

उन्होंने कहा कि यदि कोई अदालत इस विश्वास के साथ आता है कि उसे न्यायालय मिलेगा तो अदालत को भी उसकी भावना को समझना चाहिए. अगर यदि अदालत में कोई तीन तलाक़ को रद्द् कराने के लिए आता तो वो ठीक था. लेकिन अदालत का ख़ुद संज्ञान लेना ठीक नहीं है क्योंकि संविधान भी इस विषय पर मौन ही रहा ह.


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