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भोपाल सेन्ट्रल जेल से 8 सिमी कार्यकर्ताओं की कथित फरारी और 10 घंटों के भीतर शहर से 10 किमी के एरिया में उनकी कथित मुठभेड़ में मध्यप्रदेश पुलिस के हाथों मौत ने कई सवाल पैदा कर इस मुठभेड़ को सवालों के घेरे में ला दिया हैं.

इस बीच सीपीआई नेता अमीक जामेई ने देश मे निर्दोष मुस्लिम युवाओ की रिहाई की तहरीक मे शामिल रहें हैं और पिछले कई महीनो से जेलों में बंद निर्दोष युवाओ से देश में मुलाक़ात करते रहें हैं. उन्होंने इस बारें में कहा कि मुठभेड़ में मारे गये सभी सिमी कार्यकर्ता अदालत की अगली तारीखों मे छूटने वाले थे क्योंकि इनके खिलाफ दर्ज मामलो में पुलिस पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाई थी.

जामेई ने आगे कहा कि मैं हाल में जयपुर व जोधपुर के केंद्रीय कारागार मे बंद निर्दोष युवाओ से मिलने गया था और तजर्बे के आधार पर कह सकता हूँ कि आतंक के आरोप में बंद किसी भी कैदियों की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त होती है कि बिना किसी साजिश के कोई परिंदा भी वहां पर नहीं मार सकता. उन्होंने ने कहा कि ऐसे इल्ज़ाम मे बंद क़ैदियो की बैरक पर सीसीटीवी कैमरे की नज़र होती है.

जामेई ने कहा कि इन युवाओं का नाम सिमी से जोड़कर फंसाने वाले अधिकारी बेनकाब होने वाले थें इसलिए उन्होंने खुद को बचाने के लिए पहले इन्हें गोलियों से भुना फिर गोली मारकर मुठभेड़ का नाम दे दिया.

उन्होंने ने कहा कि आला अधिकारियों के इस षड्‍यंत्र में पुलिस के एक गार्ड को भी अपनी नौकरी से हाथ धोना पडा. जामेई ने मांग किया है कि सेन्ट्रल जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज शिवराज सरकार देश के सामने रखे.


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