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नई दिल्ली | प्रधानमंत्री मोदी के नोट बंदी करने के फैसले के बाद , देश से करीब 86 फीसदी करेंसी बाजार से बाहर हो गयी. इसका मतलब देश में केवल 14 फीसदी करेंसी वैध रह गयी. पिछले दस दिनों से देश इसी वैध करेंसी के ऊपर चल रहा है. कारोबार ठप हो चुके है, मंडिया सुनी पड़ी हुई है. लोगो के पास जरुरत का सामान खरीदने के भी पैसे नही है, अस्पताल में डॉक्टर इलाज करने के लिए तैयार नही है. ऐसे में सवाल यह पैदा होता है की आखिरकार यह स्थिति कितने दिनों तक रहने वाली है?

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आइये आपको बताते है की फ़िलहाल देश में करेंसी के कैसे हालात है. नोट बंदी के फैसले के बाद देश से 500 के करीब 16 अरब और 1000 के 7 अरब नोट बाजार से बाहर हो गए. इनकी जगह लेने के लिए नए 500 और 2000 के नोट छापे जा रहे है. करीब 22 अरब के नोट बाजार से बाहर होने के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती , नए नोट को जल्द से जल्द बाजार में लाने की है.

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आरबीआई की संस्था भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड की क्षमता एक महीने में 1 .3 अरब नोट छापने की है. वो भी तब जब काम दोनों शिफ्ट में हो. इसके अलावा नोट छापने की दूसरी कंपनी सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड हर महीने 1 अरब नोट छापती है. अगर दोनों कंपनी मिलकर काम करे तो हर महीने करीब 2.3 अरब रूपए छप सकते है.

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ऐसे में अगर दोनों कंपनिया दोनों शिफ्ट में लगातार काम करे तो पूरी करेंसी छापने में करीब छह महीने का वक्त लगेगा. फ़िलहाल देश में चार जगह पर नोट छपाई का काम चल रहा है. अगर बाजार में करेंसी का फ्लो होने में छह महीने का वक्त लगा तो यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. जानकारों के अनुसार इससे विकास दर में भी कटौती आ सकती है.


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