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लखनऊ | नोट बंदी के बाद देश में आर्थिक आपातकाल के हालात है. पिछले तीन दिनों में देश में कारोबार के नाम पर केवल मक्खी मारी जा रही है. क्योकि लोगो के पास छोटा पैसा नही और बड़े पैसे कोई ले नही रहा. अब यह तो कोई अर्थशास्त्री ही बता सकेगा की पिछले तीन दिनों में भारत को कारोबार न होने की वजह से कितना नुक्सान हुआ लेकिन यह तय है की अगले कुछ दिनों तक भारतीय बाजार सुने ही रहने वाले है.

लेकिन इन सब बातो से बेखबर प्रधानमंत्री मोदी जी जापान का दौरा कर रहे है और बाकी कैबिनेट मंत्री विभिन्न कार्यक्रमों में जाकर अपनी पीठ थपथपा रहे है. केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार के इस कदम की प्रशंसा करते हुए कहा की यह देश और समाज को अच्छा बनाने में सहायक होगा. राजनाथ सिंह ने इसे भ्रष्टाचार पर चोट करने के लिए उठाया गया कदम बताया.

लखनऊ यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा की नोट बंदी करने का फैसला अचानक से नही लिया गया. इसके लिए सरकार ने काफी पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी. सब कुछ योजना के अनुसार होने के बाद ही इसे लागु किया गया. 500 और 1000 के नोट बंद होने से भ्रष्टाचार खत्म होगा और कालेधन पर रोक लगेगी जिससे आमिर और गरीब की बीच पैदा हुई खायी कुछ होगी.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार 500 और 1000 का नोट बंद करने से भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगेगी , लेकिन गृहमंत्री जी आपने यह नही बताया की क्या 2000 का नोट जारी करने से भी भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी या यह और बढेगा. अगर बड़े नोट भ्रष्टाचार का जनक है तो क्या केंद्र सरकार 2000 का नोट लाकर देश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है.

दूसरा राजनाथ सिंह जी ने कहा की सब कुछ योजना के अनुसार हुआ. तो क्या यह भी आपकी योजना में शामिल था की जो नए 2000 और 500 के नोट जारी किये जायेंगे वो पुराने नोट के मुकाबले छोटे होंगे जिससे की वो देश की एटीएम मशीन में फिट न हो सके और देश की जनता त्राहि त्राहि करती रहे. बिना यह जाने की आपके नए नोट एटीएम मशीन में फिट होंगे या नही आपने पुराने नोट बंदी की घोषणा कर दी.


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