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गौरक्षा के नाम पर दलित और मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाये जाने के बाद बढ़ते विरोध के कारण भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कथित गौरक्षकों से किनारा कर लिया था. साथ ही इन  गौरक्षकों को असामाजिक करार दिया था.

लेकिन अब विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के  गौ रक्षक विभाग ने कानूनी दाव-पेंच से बचने के लिए एक नई तरकीब बताई है. रविवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र और उत्तराखंड के शीर्ष गौ रक्षकों की बैठक में युवाओं से कहा गया कि वे पशु तस्करों को भले पीटें, लेकिन उनकी हड्डियां नहीं तोड़ें.

गौ रक्षक विभाग की केंद्रीय समिति के सदस्य खेमचंद ने वीएचपी कार्यकर्ताओं से गोरक्षा के लिए काम कर रहे उन स्वंयसेवकों की लिस्ट बनाने की भी अपील की जो वीएचपी से नहीं जुड़े हैं ताकि गौ रक्षा दल से सामना होने पर कोई पशु तस्कर पशुओं के अवैध व्यापार की हिम्मत नहीं जुटा सके.

खेमचंद ने आगे कहा कि  गोरक्षा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में हाल में बहुत बातें हुईं। मैं उनकी ज्यादातर बातों से सहमत नहीं हूं, लेकिन यह जरूर मानता हूं कि हमें कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए. मैं अपने कार्यकर्ताओं से हमेशा कहता हूं- मारो, मगर हड्डी मत तोड़ो. अगर तुमने किसी की हड्डी तोड़ दी तो पुलिस को लेकर परेशानी में फंस जाओगे. कुछ लोग पशु तस्करों को पीटते हुए विडियो बनाकर हेकड़ी दिखाते हैं। उन्हें ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है.’


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