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सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में योग अनिवार्य करने के विषय को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ‘हम किसी पर योग जबरन लागू नहीं करा सकते.’

बेंच ने दिल्ली के प्रदूषण भरे माहौल का जिक्र करते हुए जनहित याचिका की पैरवी कर रहे वकील एमएन कृष्णमणि से सवाल किया कि क्या ऐसे प्रदूषित माहौल में कोई योग करता है? हालाँकि पीठ ने यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में जरूर कही लेकिन यह जरूर कहा कि हम सब पर योग थोप नहीं सकते.

मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता से शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ के समक्ष ऐसे ही मामले में हो रही सुनवाई से खुद को जोडऩे के लिए कहा.

पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह जाए और लोगों को योग करने के लिए प्रेरित करे  लेकिन ज़बरन इसे थोपा नही जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया था कि स्वास्थ्य के अधिकार को योग और स्वास्थ्य शिक्षा के बिना सुनिश्चत नहीं किया जा सकता


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