राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने कार्यकाल की समाप्ति सेस दो माह पहले मई के आखिरी हफ्ते में दो और दया याचिका ठुकरा दी है. ये दोनों याचिका बलात्कार के मामले से जुडी हुई है. जिनमे आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सज़ा सुनाई हुई है.

खारिज की गई याचिकाओं में पहला केस 2012 का है, जिसमें चार साल की एक बच्ची का रेप और फिर उसकी हत्या कर दी गई थी. मामला इंदौर का है जिसमें तीन लोगों को दोषी पाया गया था. वहीं दूसरा केस पुणे का है, जिसमें कैब ड्राइवर पर अपने साथी के साथ मिलकर युवती का रेप और हत्या के मामले में दोषी हैं.

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इंदौर केस में बाबू उर्फ केतन (22), जितेंद्र उर्फ जीतू (20) और देवेंद्र उर्फ सनी (22) पर चार साल की बच्ची का अपहरण, रेप और हत्या का आरोप था, जिसमें सभी दोषी पाए गए है. दूसरा मामला पुणे का है, जिसमें पुरुषोत्म दसरथ बोरेट और प्रदीप यशवंद कोकडे को विप्रों में काम करने वाली एक 22 वर्षिय युवती की हत्या और रेप के मामले में दोषी पाया गया है. इन मामलों में कोर्ट ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है.

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मुखर्जी राष्ट्रपति के अपने कार्यकाल में अब तक 30 क्षमायाचनाएं ठुकरा चुके हैं. वह पांच जुलाई को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर लेंगे.


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