supremecourt-ked-621x414livemint

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खां की ओर से बुलंदशहर सामूहिक बलात्कार की घटना के बारे में बयान देने से इंकार करने के बाद उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि राष्ट्र के प्रति प्रेस की जिम्मेदारी है और वह जवाबदेही से बच नहीं सकता।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने कहा, ‘‘कई अखबारों और चैनलों ने उस संवाददाता सम्मेलन के बारे में खबर दी है जिसमें मंत्री ने बयान दिया था। परंतु हम कैसे पता कर सकते हैं कि तथ्य विवादित हैं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘राष्ट्र के पति प्रेस की जिम्मेदारी है। एक जटिल मामले में वह अपने हाथ खड़े नहीं कर सकता।’’ अदालत ने खां को आदेश दिया था कि वह 17 नवंबर तक हलफनामा दायर करें। इससे पहले खां की ओर से उपस्थित वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल ने इस घटना या जांच के संदर्भ में कोई बयान नहीं दिया है।

और पढ़े -   सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से पुछा: आखिर क्यों नहीं खा सकता आम आदमी गोश्त

खां ने कहा कि यह लोकतांत्रिक सिद्धांत है कि किसी नौकरशाह को ऐसे किसी अपराध के मामले की जांच को लेकर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए जो उससे जुड़ा नहीं हो। न्यायविद और न्यायमित्र फली एस नरीमन ने कहा कि अगर अदालत मीडिया में आए मंत्री के बयान के बारे में जानना चाहती है तो वही सभी सात चैनलों और समाचार पत्रों को नोटिस जारी कर सकती है।

और पढ़े -   सीता की अशोक वाटिका घूमने पर मोहम्मद शमी हुए ट्रोल

बीते 29 जुलाई की रात बुलंदशहर में राजमार्ग पर कुछ लोगों नोएडा के एक परिवार की कार रोकी और एक महिला और उसकी बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार किया। इसी को लेकर आजम ने कथित तौर पर यह कहा था कि सामूहिक बलात्कार की यह घटना ‘राजनीतिक साजिश’ है। जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने बीते 29 अगस्त को खां के विवादित बयान का संज्ञान लिया था। (भाषा)

और पढ़े -   चीन के साथ कभी-भी हो सकती है भारत की झड़प: पूर्व सेनाप्रमुख वीपी मलिक

Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE