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2002 में गुजरात के गोधरा से शुरू होकर राज्य भर में फैले दंगों के दौरान  मेहसाणा जिले में दो लोगों की हत्या के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने 11 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

न्यायमूर्ति अनंत दवे और न्यायमूर्ति बीएन कारिया की खंडपीठ ने अभियुक्तों को ‘छूट के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई’ और राज्य सरकार को इजाजत दे दी कि 14 साल की सजा पूरी करने के बाद इन लोगों को रिहा कर दिया जाए.

ल्लू मियां सैयद और उनकी बेटी हसीना बीबी की हत्या से जुड़े इस  मामलें में निचली अदालत ने लोगों को बरी कर दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने इन्हें दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा के साथ हर एक अभियुक्त पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और समर्पण करने के लिए 10 सप्ताह का समय दिया हैं.

पिछले सप्ताह हाई कोर्ट ने इस मामले में 27 आरोपियों में से 11 को दोषी करार दिया था. इन अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 148 और 149 (गैर कानूनी ढंग से जमा होना) तथा 436 (आगजनी) के तहत दोषी करार दिया गया.


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