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गृह मंत्रालय ने कश्मीर के हालात को लेकर राज्यपाल शासन लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जमा अपनी रिपोर्ट में कहा कि रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर मे 8 जुलाई से शुरू हुई हिंसा में तीन अगस्त तक कुल 872 घटनाओं में 42 नागरिकों की मौत हुई जबकि 2656 नागरिक जख्मी हुए हैं. इस दौरान 3783 सुरक्षाकर्मी घायल हुए जबकि दो सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार नौ जुलाई से दो अगस्त के बीच 2650 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. घायलों में 470 को मेजर सर्जरी कराने की जरूरत पड़ी. रिपोर्ट में बताया गया है कि घायलों में 240 को आंखें में कथित तौर पर पैलेट गन से चोटें लगी थीं. इनमें से करीब एक चौथाई की आंखों की रोशनी बचाने के लिए मेजर सर्जरी की जरूरत पड़ी.

रिपोर्ट के अनुसार 30 जुलाई तक 51 प्रदर्शनकारी अस्पताल में अपनी आंखों इलाज करा रहे थे. जबकि चार अन्य को स्पेशलाइज्ड रेटिना ट्रीटमेंट के लिए नई दिल्ली स्थित एम्स हॉस्पिटल में ले जाया गया. वहीं घाटी में मुंबई से आए नेत्र विशेषज्ञों द्वारा तीन दिनों में कम से कम 48 हाई-एंड रेटिना सर्जरियां की गईं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर में दवाओं, आपातकाल चिकित्सा सेवा, खाद्य सामग्री और बाकी सेवाएं सुचारू रूप से चल रहीं हैं. अमरनाथ यात्रा जारी है और अभी तक 2,11,707 यात्री दर्शन कर चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट 22 अगस्त को मामले की सुनवाई करेगा.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कहा गया है कि जम्मू कश्मीर में पिछले दो हफ्ते से ‘बंदूक का राज’ चल रहा है. लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, लोग जेल कैदियों से भी बदतर हालात में रह रहे हैं. याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट, जम्मू कश्मीर के राज्यपाल को निर्देश दे कि वह राज्य के संविधान के सेक्शन 92 के तहत सारा प्रशासनिक कामकाज अपने हाथों में ले लें ताकि राज्य में सुरक्षा बहाल हो सके. साथ ही नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके,


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