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बुधवार को नेशनल प्रेस डे पर दिल्‍ली में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी बनी रहनी चाहिए. उन्होंने मीडिया पर बाहरी नियंत्रण को लेकर कहा है कि यह समाज के लिए ठीक नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘पत्रकारिता का एक अनिवार्य हिस्सा यह भी है कि जो दिखता है, सुनाई देता है उसके सिवाय भी कुछ खोजना.’ पीएम मोदी ने पत्रकारों की हत्या की घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह मीडिया की निष्पक्ष आवाज को दबाने की कोशिश होती है. सच उजगर करनेवालों की हत्या बेहद निंदनीय और चिंताजनक विषय है. इस तरह की खबरें दर्दनाक हैं.

उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल में आपातकाल की बात याद दिलाते हुए कहा कि उस दौरान मीडिया पर तरह तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे. जो किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता. पीएम मोदी ने आत्मवलोकन को भी ज़रूरी करार देते हुए कहा कि कंधार कांड और फिर 26/11 की घटना के बाद भी मीडिया के बड़े अनुभवी लोगों ने आत्म अवलोकन किया था.

उन्होंने आगे कहा, सरकार के सूचना तंत्र को मजबूत करने में भी पीसीआई की भूमिका हो सकती है. क्योंकि सरकार को भी सूचना की जरूरत रहती है.


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