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मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका के सरकार के कामों में दखल के आरोपों पर जवाब देते हुवे कहा कि न्यायपालिका को सरकार के नाकाम होने पर दखल देना पड़ता हैं. कुछ दिन पहले ही वितमंत्री अरुण जेटली और रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने न्यायपालिका के कुछ फैसलों पर सवाल उठाया था और उन्हें फैसलों को बेतूका कहा था.

ऐसे में मुख्य न्यायधीश का ये बयान मोदी सरकार के मंत्रियों द्वारा दिए गए बयानों से जोड़कर देखा जा रहा हैं. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस तीर्थ सिंह ठाकुर ने एक फिर केंद्र सरकार के कामकाज पर उंगली उठाई है. उन्होंने कहा कि हम मजबूरी में सरकार के काम में देखल देते हैं. काम संविधान के मुताबिक न हो तो दखल देना पड़ता है. कोर्ट नहीं चाहती कि सरकार का काम टेकओवर करे.

उन्होंने आगे कहा कि, जो काम किए जाने चाहिएं वो नहीं हो रहे हैं. सरकार सही काम करे तो हम दखल नहीं देंगे. कोई इसे गलत समझता है तो ये उसका परसेप्शन है.


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