जालंधर (बुलंद): बेशक मोदी सरकार 56 इंच का सीना ठोक कर कह रही हो कि पिछले 2 वर्षों में जब से केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी है तब से देश में कोई बड़ा घोटाला नहीं हुआ । पर सच्चाई इसके विपरीत है। 2014-15 में ही चावल सप्लाई व पैकिंग के नाम पर सिर्फ पंजाब और हरियाणा में ही 308 करोड़ का बारदाना घोटाला हुआ है।
 मोदी सरकार में हुआ अरबों का बारदाना घोटाला!इस घोटाले के बारे में एफ.सी.आई. पंजाब व केन्द्र सरकार को सारी खबर है। करोड़ों-अरबों की बहती गंगा में सबने हाथ धोए हैं।  इस मामले में अभी तक कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया गया न ही घोटाले के मास्टरमाइंडों को जेल भेजा गया है।  इस घपलेबाजी का जन्म तब होता है जब धान की फसल खेतों से राइस मिलों में पहुंचती है। यहां इसमें से चावल निकाल कर बारदाना (बोरियां) में पैक किया जाता है। एक बोरी में 50 किलो चावल की क्षमता होती है।
इस एक नई बोरी की सरकारी रेटों अनुसार कीमत 43 रुपए तय की गई है। इसे सरकार बारदाना व्यापारियों से खरीदती है परंतु जब यह बोरी इस्तेमाल होकर बाजार में (पुरानी होकर) बिकती है तो इसकी कीमत 10 रुपए रह जाती है। जिन अधिकारियों ने राइस मिलों की जांच करके रिपोर्ट सरकार को भेजनी होती है वे अपनी रिपोर्ट तब तक नहीं भेजते जब तक डिपुओं से बोरियां खाली होकर मार्कीट में बिकने नहीं चली जातीं।

जानकारों की मानें तो पंजाब में गत वर्ष 2014-15 में तकरीबन 7.8 करोड़ बोरियां चावल पैकिंग के लिए इस्तेमाल की गईं जिनमें 257.4 करोड़ का घपला हुआ व हरियाणा में 1.52 करोड़ बोरियां इस्तेमाल की गईं जिनमें 50.2 करोड़ का बारदाना घोटाला किया गया है। इस बारे में विभाग के जिन एफ.सी.आई. अधिकारियों ने राइस मिलों में जाकर पैकिंग व अन्य नियमोंं की चैकिंग करनी होती है वे भी सब कुछ चुपचाप देखते रहे।

जिन सीनियर अधिकारियों तक घोटाले की सूचना पहुंची, उन्होंने भी कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया। कुछ समय पहले एफ.सी.आई. की एक टीम ने चैकिंग के दौरान पाया कि पंजाब में 50 फीसदी व हरियाणा में 40 फीसदी बारदाना चावल पैकिंग में पुराना इस्तेमाल किया गया है।

इस मामले में पंजाब सरकार के फूड सप्लाई विभाग के अधिकारियों व नेताओं की भी शमूलियत किसी से कम नहीं रही परंतु अभी तक सारे मामले में कोई भी कड़ा एक्शन नहीं लिया गया ।

इस मामले में शामिल कुछ एरिया मैनेजरों को बजाय सस्पैंड करने के उनकी ही पोस्ट पर बहाल रखा गया है और कुछ अधिकारियों को तो प्रोमोट भी किया जा चुका है जो इस घोटाले का हिस्सा हो सकते हैं। अगर सिर्फ पंजाब और हरियाणा में ही 308 करोड़ का घोटाला सामने आया है तो देश भर में चावल की खरीदो-फरोख्त के अलावा गेहूं व अन्य फसलों की खरीदो-फरोख्त एवं पैकिंग में किए जा रहे बारदाना घोटाले का दायरा हजारों करोड़ रुपए तक फैल सकता है। इस मामले की सी.बी.आई. जांच की मांग आने वाले दिनों में उठ सकती है।  (punjabkesari)


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