Narendra Modi, India's prime minister, speaks during the 37th Singapore Lecture held at the Shangri-La Hotel in Singapore, on Monday, Nov. 23, 2015. Modi's government, which in February pushed back its deadline for fiscal consolidation by a year to March 2018, faces a higher wage bill just as a sluggish economy and dwindling asset sales are weighing on revenue. Photographer: Nicky Loh/Bloomberg via Getty Images

अहमदाबाद की अदालत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अधूरे वादों पर गुजराती में छपी किताब ‘फेकूजी हैव दिल्ली मा’ पर प्रतिबन्ध लगाने से इंकार कर दिया हैं. सिविल अदालत के न्यायाधीश ए. एम. दवे ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला दिया और सोमवार को याचिका खारिज कर दी.

अदालत ने कहा कि अपने फैसले में कहा कि किताब पर प्रतिबंध लगाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन होगा. अदालत ने आगे कहा कि भारत एक लोकतंत्र है और लोगों को किताब के माध्यम से अपने निजी विचार रखने का पूरा अधिकार है.

किताब पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका सामाजिक कार्यकर्ता नरसिंह सोलंकी ने दायर की थी. सोलंकी ने आरोप लगाया कि किताब का शीर्षक ही अपमानजक है ऐसे में ये प्रधानमंत्री मोदी और उनके समर्थक लोगों की भावनाओं को आहत पहुंचाएगी.

इस किताब में मोदी के अध्रुरे वादों के बारे में लिखा गया हैं. ये किताब पालड़ी निवासी जे.आर. शाह ने लिखी और अपनी ही फर्म जे.आर. एंटरप्राइज से प्रकाशित कराई हैं.


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