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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने  मानवाधिकार आयोग के मौजूदा अधिकार पर सवाल उठाते हुवे कहा कि फिलहाल आयोग के पास पर्याप्त पावर नहीं दिए गए है। उन्होंने आयोग को सशक्त करने पर जोर देते हुए कहा कि मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में अपनी सिफारिशें मनवाने के लिए आयोग को पर्याप्त अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है।

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दत्तू ने आगे कहा, ‘एनएचआरसी बिना दांत के एक बाघ की तरह है। हम बड़ी मेहनत के साथ मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच करते हैं। कभी-कभी बेहद कम संसाधनों में दूर-दराज के इलाकों में भी जाना पड़ता है। वहां से एनएचआरसी के अध्यक्ष और इसके सदस्य जो कि पूर्व न्यायाधीश होते हैं वे साक्ष्यों को इकट्ठा कर उसे फोरेंसिक जांच के लिए देते हैं। लेकिन, जब आखिर में एनएचआरसी किसी नतीजे पर पहुंचता है उसके बाद ये केवल सुधारात्मक उपाय के लिए सिर्फ सिफारिश कर सकता है या फिर राज्य को संबंधित पक्ष को मुआवजा देने के लिए निर्देश दे सकता है।’

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उन्होंने कहा, ‘हम संबंधित अधिकारियों को अपनी सिफारिश मानने के लिए लिए पत्र लिखते हैं। लेकिन, यह बात उन अधिकारियों की इच्छा पर निर्भर करती है कि वो उन सिफारिशों को माने या ना माने। अब ये सांसदों पर निर्भर करता है कि वे विचार-विमर्श कर फैसला करें कि एनएचआरसी की तरफ से की गई सिफारिश को मानने के लिए संबंधित अधिकारी बाध्य हो।’

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