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भारतीय सेना द्वारा पीओके में सर्जिकल ऑपेरशन के बाद ही गुरूवार को 22 देशों के राजदूतों को इसके बारे में जानकारी दे दी थी. भारत ने इस बारे में अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस सहित 22 देशों के शीर्ष राजनयिकों को इस मामले से अवगत करा दिया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने इसकी पुष्टि की हैं.

प्राप्त जानकारी के अनुसार राजदूतों को बताया गया कि ‘उरी आतंकी हमले के बाद यह अनिवार्य हो गया था कि आतंकियों का सफाया किया जाये. उन्हें यह भी बताया गया कि भारतीय सेना की यह कार्रवाई वॉर क्राइम नहीं है, क्योंकि भारत-पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा (एलओसी) को पार करना वॉर क्राइम नहीं है, जबकि दोनों देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा (इंटरनेशनल बॉर्डर) का उल्लंघन युद्द अपराध है.’

विदेश सचिव ने उन्हें बताया कि यह ‘‘सैन्य से ज्यादा असल में आतंकवाद निरोधी अभियान’’ है और यह उन आतंकवादियों को मार गिराने के लिए था जिन्हें जम्मू कश्मीर तथा भारत के अन्य प्रमुख शहरों पर हमलों के लिए प्रशिक्षण दिया गया था.
उन्हें यह भी बताया गया कि भारत की फिलहाल इस तरह के किसी अन्य अभियान की योजना नहीं है लेकिन कहा गया कि सैन्य बल आतंकवादियों को कोई हमला करने नहीं देंगे.

 


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