नई दिल्ली | पिछले कुछ महीनो में घाटी में सुरक्षाबलो पर लगातार आतंकी हमले हो रहे है. ज्यादातर हमलो में आतंकी सुरक्षाबलो के कैंप पर हमला कर रहे है. बांदीपुरा में सीआरपीएफ के संभल कैंप पर हुए एक ऐसे ही आतंकी हमलो को नाकाम कर दिया गया. इसके पीछे जहाँ सीआरपीएफ जवानों की बहादुरी एक बड़ा कारण थी वही कुछ ऐसे कारक भी थे जिनकी वजह से आतंकियों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही को अंजाम दिया जा सका. इनमे से एक थे कमांडेंट इकबाल अहमद.

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इक़बाल अहमद को 45 सीआरपीएफ बटालियन की कमांड सौपी गयी थी. उनको, सीआरपीएफ के ही बहादुर जवान चेतन चीता को गोली लगने के बाद यह कमान सौपी गयी. अब चूँकि रमजान का महीना चल रहा है इसलिए इकबाल ने भी रोजा रखा हुआ है. सोमवार को सीआरपीएफ के संभल कैंप पर जब हमला हुआ तब इक़बाल सहरी (रोजे के दौरान सुबह का खाना)  की वजह से जल्दी उठ गए.

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तभी इकबाल के वायरलेस पर आतंकी हमले की सूचना आई.  जिस समय यह सूचना मिली उस समय इकबाल संभल कैंप से केवल 300 मीटर दूर थे. हमले की सूचना मिलते ही वो सहरी बीच में छोड़ अपनी रायफल उठा कैंप की तरह दौड़े. इसके अलावा उन्होंने बाकी जगह पर भी हमले की सूचना भेजी जिसकी कारण आतंकियों के खिलाफ त्वरित कर्यवाही हो सकी और हमले को नाकाम किया गया.

इकबाल तब तक कैंप में ही रुके रहे जब तक हमला करने आये सभी आतंकियों को मार गिराया नही गया. हमले के नाकाम होने के बाद कमांडेंट इकबाल सुर्खियों मे छा गए. हालाँकि इकबाल के अलावा , सीआरपीएफ के दो कुत्ते भी इस हमले को नाकाम करने में मददगार रहे. उन्होंने कैंप में घुसपैठ होते ही भोंकना शुरू कर दिया जिसकी वजह से जवानों को घुसपैठियों के होने की आशंका हो गयी और वो सब चौकन्ने हो गए.

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