ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली, 16 मार्च। ऑल इंडिया तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम 18 मार्च जुमे की नमाज़ के बाद दिल्ली की चुनिन्दा मस्जिदों के बाहर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के विरुद्ध प्रदर्शन करने जा रही है। तंज़ीम के इस प्रदर्शन को कई संगठनों, मस्जिदों और मदरसों ने समर्थन दिया है। बड़े विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम शास्त्री पार्क की क़ादरी मस्जिद के बाहर जुमे की नमाज़ के बाद रखा गया है जिसकी अगुवाई तंज़ीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी करेंगे। आपको बता दें कि क़रीब एक माह पूर्व भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बहराइच के दौरे पर दरगाह हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी की शान में भद्दे शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें ‘आक्रांता’ और चरित्रहीन बताने का घटिया बयान दिया था। तभी से सूफ़ी समुदाय अमित शाह से माफ़ी की माँग पर अड़ा हुआ है।

mufti ashafaq hausain qadri

तंज़ीम ने यहाँ जारी बयान में आज कहाकि जुमे की नमाज़ के बाद नियोजित प्रदर्शन में तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम की अगुवाई में सदा-ए-सूफ़िया-ए-हिन्द, जमीअत अलमंसूर, मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन, अंजुमन गुलशन-ए-तैबा, मुहम्मदी यूथ ब्रिगेड, सुल्तानुल हिन्द फ़ाउंडेशन, रज़ा एक्शन कमेटी समेत कई सूफ़ी संगठन साथ आ रहे हैं। इसके अलावा मदरसों में मदरसा ग़ौसुस सक़लैन, न्यू सीलमपुर ने भी प्रदर्शन में साथ आने की सहमति दे दी है।

तंज़ीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने बताया कि शास्त्री पार्क की क़ादरी मस्जिद के अलावा बुलंद मस्जिद, अमीर हम्ज़ा मस्जिद, गौतमपुरी, फ़ारूक़-ए-आज़म, गाँधी नगर, रज़ा मस्जिद, शास्त्री पार्क, अता-ए-रसूल मस्जिद, खजूरी और ग़ौसिया मस्जिद मज़ार वाली के बाहर अमित शाह के विरुद्ध ज़ोरदार प्रदर्शन की योजना बन चुकी है। उम्मीद की जा रही है कि गुरूवार की रात और शुक्रवार की सुबह तक दिल्ली की 50 से अधिक मस्जिदों की सहमति प्राप्त हो जाने की उम्मीद है।

संघ की साम्प्रदायिक चाल: तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि पिछले महीने एक कार्यक्रम के बहाने बहराइच आए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने महान् सूफ़ी संत हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ की शान में अनर्गल, तथ्यहीन और अपमानजनक बातें कही हैं। क़ादरी ने कहाकि महान् संत हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी की दरगाह पर लाखों श्रद्धालु अपनी मन्नतें मांगने आते हैं जिसमें बहुसंख्यक हिन्दू भाई और बहनें होती हैं। समय समय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और इनके आनुषांगिक संगठन दरगाह पर इन्हें जाने से रोकने के लिए बहुत मेहनत करते हैं और कैम्प लगाते हैं मगर लोग फिर भी अपनी फ़रियाद सैयद मसूद तक पहुँचाते हैं। कई साल की मेहनत के बाद भी जब भारतीय जनता पार्टी अपने एजेंडे में कामयाब नहीं हो पाई तो इस बार अपने सबसे बड़े नेता को लेकर बहराइच पहुँची जहाँ पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने गाजी मियाँ की शान में गुस्ताख़ी की है। क़ादरी ने कहाकि अमित शाह अपने से ऊपर आरएसएस के सरसंघ चालक और प्रधानमंत्री को भी लेकर आ जाएँ तब भी क्षेत्र के लोगों की ग़ाज़ी मियाँ में आस्था को नहीं मिटा सकते। क़ादरी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के चुनाव को देखते हुए अमित शाह समाज को साम्प्रदायिक आधार पर बाँटने के लिए चले आए जबकि वह उनके इस पिटे हुए फ़ॉर्मूले को बिहार और दिल्ली की जनता ने क्या सबक़ सिखाया है यह सबके सामने है।

तंज़ीम कार्यकर्ताओं की इच्छा का सम्मान: क़ादरी ने कहाकि अमित शाह के बयान के बाद बहराइच, लखनऊ और देश भर से आए कार्यकर्ताओं के आपत्ति के पिछले एक महीने से टेलीफ़ोन आ रहे थे जिसके बाद संगठन के पदाधिकारियों के साथ कई दौर की वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग की। कार्यकर्ताओं को अपने संदेश में मुफ़्ती अशफ़ाक़ ने कहाकि अमित शाह ने झूठे तथ्य पेश कर क्षेत्र की क़ानून और व्यवस्था को बरग़लाने की कोशिश की है जबकि सच्चाई यह है कि ग़ाज़ी मियाँ की दरगाह सभी दलित और पिछड़ी जातियों के श्रद्धालु अपनी मन्नते मानने के लिए आते हैं। यह जानना आवश्यक है कि हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ पहले सूफ़ी संत हज़रत अली की संतान हैं और भारत के मुसलमान यह साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ने नहीं देंगे और भारत के बहुलवादी सेकूलर मिज़ाज को बचाने के लिए प्रयास करते रहेंगे।

तंज़ीम के अध्यक्ष ने कहाकि संगठन से जुड़े 10 लाख कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि भारतीय मुसलमानों की 25 करोड़ की जनसंख्या को अमित शाह की बकवास से बहुत दुख पहुँचा है और इसका जवाब उत्तर प्रदेश समेत पाँच राज्यों के चुनाव में दिया जाएगा। तंज़ीम ने अमित शाह को माफ़ी माँगने का जो समय दिया था, वह समाप्त हो चुका है। अगर इस प्रदर्शन के बाद भी अमित शाह ने माफ़ी नहीं माँगी तो अगली रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध बड़ा प्रदर्शन आयोजित कर लखनऊ के बीजेपी दफ़्तर का घेराव किया जाएगा।

मोदी का झूठ सामने आया: तंज़ीम के अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सूफ़ीवाद की झूठी तारीफ़ें करते हैं और सूफ़ी नेताओं से मुलाक़ात में सूफ़ी परम्परा को इस्लाम की सही धारा कहते हैं जबकि उनकी पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह सूफ़ी संतों का अपमान करते हैं। यह दिखाता है कि या तो नरेन्द्र मोदी की राय का अमित शाह की नज़र में कोई महत्व नहीं या फिर दोनों मैच फ़िक्स कर खेल रहे हैं। कुछ सूफ़ी नेताओं से मिलकर अगर नरेन्द्र मोदी यह समझते हैं कि वह महान् सूफ़ी संत हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ का अपमान कर मुसलमानों को बाँटने और साम्प्रदायिक तनाव पैदा कर उत्तर प्रदेश का चुनाव जीत लेंगे तो वह ग़लत सोच रहे हैं। मुफ़्ती अशफ़ाक़ ने कहाकि हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ के ख़िलाफ़ बकवास करके अमित शाह दरअसल सूफ़ी नेताओं का केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के प्रति रवैया जानना चाहते हैं तो उन्हें समझ लेना चाहिए कि देश के मुसलमान यह मानते हैं कि अमित शाह को तुरन्त देश और मुसलमानों से माफ़ी माँगनी चाहिए।

इशारों को समझो शाह: तंज़ीम के अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ के लिए जो भी अपमान की भाषा इस्तेमाल करता है, उसका राजनीतिक जीवन चौपट हो जाता है। क़ादरी ने कहाकि अमित शाह और स्थानीय नेताओं में अगर अक़ल हो तो उनके लिए दो इशारे काफ़ी हैं। पहला अमित शाह के लिए बहराइच में तैयार किया गया मंच टूट गया था जबकि अमित शाह वहीं मौजूद थे। यह इशारा है कि हज़रत ग़ाज़ी मियाँ को नाराज़ मत करो लेकिन अमित शाह नहीं माने। क़ादरी ने कहाकि एक ज़माने में इसी तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी के विनय कटियार ने किया था और तभी से उनका राजनीतिक भविष्य अँधकार मे जाना शुरू हो गया था। आज केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की बेशक सरकार हो लेकिन विनय कटियार को कोई नहीं पूछ रहा। क़ादरी ने अमित शाह और उनके समर्थकों को मश्विरा दिया यदि वह राजनीति में लंबी पारी खेलना चाहते हैं तो उन्हें फ़ौरन हज़रत ग़ाज़ी मियाँ से माफ़ी माँगनी चाहिए। वैसे बंगाल, असम, केरल, पंजाब और उत्तर प्रदेश के चुनाव के नतीजे हो सकता है अमित शाह को विनय कटियार बना दें।


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