सांसदों और विधायकों पर आपराधिक मामलों को लेकर सख्ती दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब राजनीती से गंदगी साफ़ करने का फैसला ले लिया है.  कोर्ट ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मुकदमों को निपटाने के लिए स्पेशल कोर्ट के गठन का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश देते हुए कहा कि दागी नेताओं के केस की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनने चाहिए और इसमें कितना वक्त और फंड लगेगा यह 6 हफ्तों में बताएं. इस पर केंद्र सरकार ने कहा, हम स्पेशल कोर्ट के लिए तैयार हैं पर यह राज्यों का मामला है.

केंद्र के  इस जवाब पर कोर्ट ने कहा कि आप सेंट्रल स्कीम के तहत स्पेशल कोर्ट बनाने के लिए फंड बताये कि कितना लगेगा? कोर्ट ने कहा, इसके बाद हम देखेंगे कि जजों की नियुक्ति और इन्फास्ट्रक्चर कैसे होगी.

कोर्ट ने इस दौरान केंद्र से कई तीखे सवाल भी किये और पूछा मसलन 2014 के चुनाव के दौरान 1581 उम्मीदवारों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का क्या हुआ? इनमें से कितने मामलों में सजा हुई, कितने लंबित हैं और इन मामलों की सुनवाई में कितना वक्त लगा? कोर्ट ने ये भी पूछा कि 2014 के बाद 2017 तक इनमें से चुने गए जनप्रतिनिधियों के के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों का क्या हुआ?

याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि बिना आंकड़ों के आपने इस बारे में याचिका कैसै दाखिल कर दी? क्या आप यह चाहते हैं कि हम केवल कागजी फैसला देकर साबित कर दें कि भारत में राजनीति का अपराधीकरण हो चुका है.


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